लखनऊ : राजधानी में इंदिरानगर निवासी सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी से डिजिटल अरेस्ट कर लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है. आरोप है कि साइबर ठग ने खुद को ईडी अधिकारी बताकर सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी को आठ दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा और 96.65 लाख विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए.

आरोपी ने उन्हें फिरौती के मामले में फंसाने और गिरफ्तार करने की धमकी दी थी. ठगों ने और पैसों की मांग की, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ. जिसके बाद उन्होंने कमिश्नरेट के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई.
खातों को फ्रीज कराने में जुटी साइबर क्राइम पुलिस : साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर आलोक राय ने बताया कि तहरीर के आधार पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर लिया गया है. जिन नंबरों से कॉल आई थी और जिन खातों में 96.65 लाख रुपये ट्रांसफर हुए हैं, उनकी विस्तृत पड़ताल की जा रही है. संबंधित बैंकों से संपर्क कर खातों को सीज कराने की विधिक प्रक्रिया जारी है.
पीड़ित आदेश कुमार के मुताबिक, ठगी की शुरुआत 17 सितंबर की दोपहर करीब एक बजे हुई एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई. काॅल करने वाले ने खुद को ईडी का वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके पहचान पत्र का इस्तेमाल कर मुंबई में एक सिम कार्ड जारी कराया गया है, जिसके जरिए कई बड़े लोगों से फिरौती मांगी जा रही है.
उनका आरोप है काॅल करने वाले ने कहा कि उनके खिलाफ गैर-जमानती केस दर्ज हो चुका है और बेगुनाही साबित करने के लिए तुरंत एनओसी लेनी होगी, वरना गिरफ्तारी तय है. आरोप है कि पीड़ित के घबराते ही उसी नंबर से व्हाट्सएप वीडियो कॉल आई, जिसमें एक शख्स बकायदा पुलिस की वर्दी और नेमप्लेट के साथ बैठा दिखाई दिया. जालसाज ने उनके नाम का हूबहू असली दिखने वाला अरेस्ट वारंट व्हाट्सएप पर भेज दिया और जांच में सहयोग की बात कहकर उन्हें कमरे में ही डिजिटल अरेस्ट कर लिया.
दबाव बनाकर तुड़वाईं एफडी : डिजिटल अरेस्ट के दौरान जालसाज पीड़ित को कैमरे के सामने से हटने नहीं देते थे. आरोप है कि 19 सितंबर को ठगों ने कहा कि उनके सभी बैंक खातों की वित्तीय जांच फाइनेंशियल ऑडिट की जाएगी, जिसके लिए पूरी रकम को सरकार के सुरक्षित खाते में ट्रांसफर करना होगा. अपराधियों के मानसिक दबाव में आकर बुजुर्ग अधिकारी ने अपनी कई एफडी समय से पहले तुड़वा दीं. 19 सितंबर से 24 सितंबर के बीच अलग-अलग किस्तों में करीब 96 लाख 65 हजार रुपये जालसाजों के दिए बैंक खातों में आरटीजीएस और ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए गए.
एडीसीपी क्राइम किरण यादव ने लोगों से अपील की है कि कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई व्यवस्था नहीं है. कोई भी पुलिस, सीबीआई, कस्टम्स या ईडी अधिकारी वीडियो कॉल पर किसी को हिरासत में नहीं ले सकता है. ऐसे कॉल्स आते ही तुरंत फोन काटें और बिना डरे नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें.
