बिना निशान की थायरॉइड सर्जरी क्या है? जानें प्रक्रिया और फायदे

कई दशकों से थायरॉइड की सर्जरी गर्दन के सामने चीरा लगाकर की जाती रही है. हालांकि, यह तरीका कई तरह की थायरॉइड समस्याओं के लिए आज भी ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ बना हुआ है, लेकिन टेक्नोलॉजी में हो रही तरक्की के साथ इलाज के तरीके भी बदल रहे हैं. मेडिकल साइंस में हुई तरक्की ने थायरॉइड के मरीजों के इलाज को काफी आसान और कम दर्दनाक बना दिया है. पारंपरिक ओपन सर्जरी, जिसमें गर्दन पर 4-8 सेमी का बड़ा और स्थायी निशान रह जाता था, उसके मुकाबले अब नए आधुनिक विकल्प मौजूद हैं.

जो मरीज आज गर्दन पर चीरे के निशान से बचना चाहते हैं, वे बिना निशान वाली या रिमोट-एक्सेस थायरॉइड सर्जरी चुन सकते हैं. यह पारंपरिक सर्जरी का एक आधुनिक और बेहतरीन विकल्प है, क्योंकि इससे गर्दन पर कोई स्थायी निशान नहीं पड़ता. यह तकनीक उन मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद है जो कॉस्मेटिक कारणों से गर्दन पर चीरा नहीं लगवाना चाहते. इसके अलावा, नॉन-कैंसरस (बिनाइन) थायरॉइड नोड्यूल्स वाले मरीज माइक्रोवेव एब्लेशन (MWA) तकनीक चुनकर पारंपरिक सर्जरी से पूरी तरह बच सकते हैं.

इस तरह रोबोटिक प्लेटफॉर्म सर्जनों की करते हैं मदद
जयपुर के CK बिड़ला हॉस्पिटल्स (RBH) में ब्रेस्ट और एंडोक्राइन सर्जन, डॉ. अनुकृति सूद बताती हैं कि रिमोट-एक्सेस तकनीकों (जैसे रोबोटिक और एंडोस्कोपिक थायरॉइडेक्टॉमी) में शरीर के कम दिखने वाले हिस्सों, जैसे बगल या मुंह के अंदर, छोटे चीरे लगाकर थायरॉइड ग्लैंड को निकाला जाता है, जिससे गर्दन पर कोई निशान नहीं दिखता है. इन तकनीकों का मकसद पारंपरिक सर्जरी जैसे ही कैंसर से जुड़े और फंक्शनल नतीजे देना है, साथ ही बेहतर कॉस्मेटिक नतीजे भी देना है.

रोबोटिक प्लेटफॉर्म सर्जनों को बड़ा और थ्री-डायमेंशनल (3D) व्यू और बहुत अच्छे से मुड़ने वाले इंस्ट्रूमेंट देता है, जिससे वे रिकरेंट लैरिंजियल नर्व और पैराथायरॉइड ग्लैंड जैसे नाज़ुक हिस्सों के आस-पास बहुत बारीकी से काम कर पाते हैं. हालांकि, टेक्नोलॉजी सिर्फ एक हिस्सा है. मरीज का सही चुनाव और सर्जन की विशेषज्ञता ही सफल नतीजे के लिए सबसे जरूरी बातें हैं.

माइक्रोवेव एब्लेशन कैसे काम करता है
डॉ. अनुकृति सूद बताती हैं कि एक और रोमांचक डेवलपमेंट माइक्रोवेव एब्लेशन है, जो बिनाइन थायरॉइड नोड्यूल के लिए एक मिनिमली इनवेसिव (कम चीर-फाड़ वाली) और बिना चीरे वाली प्रक्रिया है. अल्ट्रासाउंड की मदद से, एक पतले प्रोब के जरिए माइक्रोवेव एनर्जी दी जाती है जिससे नोड्यूल सिकुड़ जाता है, लक्षणों में राहत मिलती है और कॉस्मेटिक लुक बेहतर होता है, साथ ही सामान्य थायरॉइड टिश्यू भी सुरक्षित रहता है. ज्यादातर मरीज उसी दिन घर लौट आते हैं और गर्दन पर बिना किसी निशान के तेजी से ठीक हो जाते हैं.

डॉ. अनुकृति सूद का यह भी कहना है कि ये नई तकनीकें हर किसी के लिए सही नहीं हैं. बड़े गोइटर, तेजी से फैलने वाले थायरॉइड कैंसर, थायरॉइडाइटिस या जिन मरीजों को ज्यादा लिम्फ नोड हटाने की जरूरत होती है, उनका इलाज अक्सर पारंपरिक ओपन सर्जरी से ही बेहतर होता है. थायरॉइड के इलाज का भविष्य पर्सनलाइज्ड और मिनिमली इनवेसिव देखभाल की ओर बढ़ रहा है. चाहे रोबोटिक सर्जरी हो, एंडोस्कोपिक तकनीकें हों, माइक्रोवेव एब्लेशन हो या पारंपरिक सर्जरी, मकसद एक ही रहता है, हर मरीज को सुरक्षित और असरदार इलाज देना, साथ ही काम-काज, कॉस्मेटिक और जीवन की गुणवत्ता के मामले में सबसे अच्छे नतीजे देना.

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सुझाव केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए हैं. हम यह जानकारी वैज्ञानिक शोध, अध्ययनों और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों की अनुशंसाओं के आधार पर प्रदान कर रहे हैं. इन सुझावों का पालन करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करना सर्वोत्तम होगा.)