क्या पीएम मोदी के ‘बॉस’ 5 राज्यों के रण में दिखा पाएंगे कमाल? भाजपा के नए ‘सारथी’ का पहला लिटमस टेस्ट

नई दिल्लीः भारतीय राजनीति के शतरंज पर विधानसभा चुनाव 2026 की बिसात बिछ चुकी है. चुनाव आयोग ने असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी की 824 सीटों के लिए चुनावी बिगुल फूंक दिया है. लेकिन इस बार की जंग भाजपा के लिए सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि अपने नए सेनापति नितिन नबीन के कौशल का सबसे बड़ा ‘लिटमस टेस्ट’ भी है.

राष्ट्रीय अध्यक्ष का पहला बड़ा इम्तिहान

जनवरी 2026 में जब 45 वर्षीय नितिन नबीन ने दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी की कमान संभाली, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें मुख्यालय में पदभार दिलाते हुए ‘पार्टी मामलों का बॉस’ कहा था. अब 4 मई को जब इन पांच राज्यों के नतीजे आएंगे, तो यह तय होगा कि मोदी के इस भरोसे पर नबीन कितने खरे उतरे.

नबीन के अध्यक्ष बनते ही केंद्रीय चुनाव समिति की बैठकें उनके अधीन शुरू हो चुकी थीं. उन्होंने असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी की तैयारी की समीक्षा भी की, उम्मीदवारों की सूचियां भी जारी कीं गईं. नितिन नबीन का सभी चार चुनावी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी का दौरा हो चुका है. अध्यक्ष बनने के तुरंत बाद नितिन नबीन ने असम से पश्चिम बंगाल तक इन चुनावी राज्यों पर काफी फोकस किया है.फरवरी 2026 में उन्होंने केरल का दो-दिवसीय दौरा किया, जहां कोच्चि, एर्नाकुलम और त्रिशूर में कोर कमिटी, बूथ अध्यक्ष सम्मेलन, एनडीए नेताओं से बैठकें कीं और बूथ स्तर पर वॉल पेंटिंग भी की. असम में 19 फरवरी को सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लिया. तमिलनाडु, तेलंगाना और पुडुचेरी में भी दिसंबर 2025-जनवरी 2026 में दौरा किया. पश्चिम बंगाल में जनवरी अंत में दुर्गापुर और आसनसोल का दौरा कर पार्टी की ताकत पर जोर दिया. यही नहीं पार्टी अध्यक्ष का दौरा इन सभी राज्यों में लगातार जारी है.

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी और अमित शाह नितिन नबीन के संगठनात्मक कार्यक्रमों, जैसे बूथ सशक्तिकरण, युवा वॉइस समिट, परिवर्तन यात्रा जैसे कार्यक्रमों को पूर्ण समर्थन भी दे रहे हैं. अध्यक्ष पद पर आने के तीसरे महीने में ही वो देश के कई राज्यों की संगठनात्म बैठक चाहे वहां जाकर या ऑनलाइन कर चुके हैं.

चुनाव की तैयारियों का गणित

सूत्रों की मानें तो पश्चिम बंगाल के महासंग्राम में जहां पीएम मोदी 14 और अमित शाह 8 रैलियां करेंगे, वहीं नितिन नबीन को 7 रैलियों की जिम्मेदारी दी गई है. यह आंकड़ा साफ करता है कि भाजपा अब ‘मोदी-शाह-नबीन’ की त्रिशक्ति के सहारे मैदान में है. नबीन की सक्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पद संभालने के तीन महीने के भीतर ही वे केरल की गलियों में ‘वॉल पेंटिंग’ करते और असम से लेकर पुडुचेरी तक संगठन को धार देते नजर आए.

नितिन नबीन के सामने चुनौतियां

असम: सत्ता को बरकरार रखना
पश्चिम बंगाल: पूर्ण बहुमत के साथ ममता के दुर्ग को ढहाना
केरल और तमिलनाडु: दक्षिण भारत में भाजपा के लिए ‘ब्रेकथ्रू’ हासिल करना
पुडुचेरी: एनडीए की सत्ता में वापसी सुनिश्चित करना
AI और डिजिटल वॉर रूम

नितिन नबीन की रणनीति केवल रैलियों तक सीमित नहीं है. इस बार भाजपा AI-स्ट्रैटजी, बूथ सशक्तिकरण और ‘युवा वॉइस समिट’ जैसे आधुनिक हथियारों से लैस है. 17.4 करोड़ मतदाताओं तक केंद्र की योजनाओं को पहुंचाना और ‘परिवर्तन यात्रा’ के जरिए माहौल बनाना नवीन के एजेंडे में सबसे ऊपर है.
2029 का ट्रेलर?

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि इन पांचों राज्यों में भाजपा की सफलता 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले नितिन नबीन के नेतृत्व पर मुहर लगा देगी. क्या बिहार का यह पांच बार का विधायक, जो अब देश की सबसे बड़ी पार्टी का अध्यक्ष है, दक्षिण और पूर्व के इस अभेद्य किले को फतह कर पाएगा? 4 मई का इंतजार पूरे देश को है.