महंगे होटलों को टक्कर देंगे होम-स्टे, यूपी में 31 प्रतिभागियों को मिली ट्रेनिंग

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में पहल करते हुए पर्यटन विभाग के अंतर्गत संचालित कांशीराम इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म मैनेजमेंट (एमकेआईटीएम) में प्रदेश भर से आए होम-स्टे मालिकों के लिए पांच दिवसीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम आयोजित किया. 16 से 20 मार्च तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में 31 प्रतिभागियों को होम-स्टे के कुशल संचालन, आधुनिक पर्यटन कौशल और बेहतर आतिथ्य सेवाओं की बारीकियों की जानकारी दी जा रही है.

 

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार निरंतर नवाचार और कौशल विकास पर जोर दे रही है. होम-स्टे मालिकों के लिए आयोजित यह उद्यमिता विकास कार्यक्रम न सिर्फ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि ग्रामीण पर्यटन को सशक्त कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा.

 

होम-स्टे पर्यटन की मजबूत नींव बनेंगे : प्रदेश सरकार का मानना है कि आने वाले समय में होम-स्टे राज्य के पर्यटन की मजबूत नींव बनेंगे. सरकार का विजन स्पष्ट है कि पर्यटकों को सुरक्षित, आरामदायक सुविधाएं, बेहतर खान-पान और घर जैसा अपनापन मिले जिससे हर सैलानी खास अनुभव लेकर लौटे. यही कारण है कि प्रदेश भर में होम-स्टे अब महंगे होटलों का किफायती विकल्प बनते जा रहे हैं.

 

होम-स्टे मॉडल तेजी से उभर रहा : उन्होंने बताया कि देशी-विदेशी पर्यटकों की बढ़ती आमद के बीच उत्तर प्रदेश में होम-स्टे मॉडल तेजी से उभर रहा है. इससे जहां ठहरने के लिए कमरों की संख्या बढ़ रही है, वहीं बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं. एमकेआईटीएम में होम-स्टे मालिकों के लिए आयोजित उद्यमिता विकास कार्यक्रम में प्रतिभागियों को होम-स्टे की अवधारणा, उसकी आवश्यकता और उपलब्धता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई.

 

प्रशिक्षण के दौरान कम लागत में प्रभावी होम-स्टे सिस्टम विकसित करने के तरीके सिखाए गए. विभिन्न टैरिफ प्लान, बजट और लागत नियंत्रण की तकनीकों पर जानकारी दी गई. इसके अलावा प्रतिभागियों को समस्या समाधान, सेवाओं में सुधार, होम-स्टे के रखरखाव और इंटीरियर साज-सज्जा के महत्वपूर्ण पहलुओं से भी अवगत कराया गया.

 

पुराने ढर्रे छोड़ अपनाएं पेशेवर तरीके : उन्होंने बताया कि ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम-स्टे संचालकों को अब पारंपरिक ढर्रे से निकालकर आधुनिक और पेशेवर बनाने पर जोर दिया जा रहा है. प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को सोशल मीडिया और डिजिटल पेमेंट के गुर भी सिखाए गए, वहीं अतिथि पंजीकरण और पर्यटकों को जरूरी जानकारी देने के तरीके भी बताए गए. प्रशिक्षण के दौरान होम स्टे की साफ-सफाई और रखरखाव पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ रिस्पांसिबल टूरिज्म के महत्व को विस्तार से समझाया गया, जिससे पर्यटकों को बेहतर और यादगार अनुभव मिल सके.

 

ऊर्जा संरक्षण से आतिथ्य प्रबंधन तक की जानकारी : होम-स्टे संचालकों को प्रोफेशनल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को ऊर्जा संरक्षण, वैकल्पिक ऊर्जा के इस्तेमाल, बेहतर आतिथ्य प्रबंधन और ग्राहक सेवा की बारीकियां सिखाई गईं. इस दौरान व्यक्तित्व विकास, खाद्य व्यंजनों के मानकीकरण और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने पर खास जोर दिया गया. चौथे दिन प्रतिभागियों को पाठ्य सामग्री और प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए. कार्यक्रम के तहत चार दिन (16-19 मार्च) थ्योरी सत्र और पांचवें दिन फार्म विजिट के जरिए प्रैक्टिकल जानकारी दी जाएगी.

 

होम स्टे संचालन में मिलेगी मदद : लखनऊ, वाराणसी, लखीमपुर खीरी, बरेली, सिद्धार्थनगर, अम्बेडकर नगर, शाहजहांपुर, कासगंज और उन्नाव से पहुंचे प्रतिभागियों ने इस पहल को ग्रामीण पर्यटन के लिए गेमचेंजर बताया. शाहजहांपुर के यादव होम स्टे के संचालक देवेंद्र सिंह, कासगंज के गुप्ता होम स्टे के आकाश सिंह और उन्नाव के बक्सर स्थित राहुल होम स्टे के राहुल कुमार समेत अन्य प्रतिभागियों ने कहा कि इस प्रशिक्षण से उन्हें अपने व्यवसाय को बेहतर तरीके से संचालित करने और पर्यटकों को बेहतर अनुभव देने में बड़ी मदद मिलेगी.