यूपी लघु उद्योग निगम ने सरकार को दिया 2.68 करोड़ का लाभांश, लगातार 7वें साल मुनाफे में

लखनऊ: उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम लिमिटेड ने लगातार सातवें वर्ष लाभ अर्जित करते हुए राज्य सरकार को 2 करोड़ 68 लाख 20 हजार रुपये का लाभांश सौंपा है. निगम के उपाध्यक्ष नटवर गोयल एवं अध्यक्ष राकेश गर्ग ने शुक्रवार को लाभांश का चेक शासन को भेंट किया. निगम की ओर से जारी पत्र के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 तक निगम ने कुल 267.60 लाख रुपये का लाभ अर्जित किया था, जिसकी घोषणा 2 अप्रैल 2026 को की गई थी. इसी लाभ में से 2.68 करोड़ रुपये का लाभांश राज्य सरकार को प्रदान किया गया है.

औद्योगिक ढांचे के विकास में योगदान: जून 1958 में स्थापित उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम का उद्देश्य प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को कच्चा माल उपलब्ध कराना, उनके उत्पादों का विपणन करना तथा औद्योगिक आस्थानों का निर्माण एवं विकास करना है. पत्र में बताया गया है कि निगम प्रदेश में एमएसएमई क्षेत्र को प्रोत्साहन देने, रोजगार के अवसर सृजित करने तथा औद्योगिक अधोसंरचना को मजबूत बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है. निगम ने प्लग एंड प्ले औद्योगिक शेड विकसित करने, निर्यात संवर्धन, विभिन्न सरकारी विभागों की परियोजनाओं के निर्माण तथा युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इसके परिणामस्वरूप प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति मिली है और हजारों लोगों के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं.

व्यवसाय विस्तार के लिए शासन से तीन प्रमुख मांग: लाभांश सौंपने के साथ ही निगम ने राज्य सरकार से व्यवसाय विस्तार के लिए तीन महत्वपूर्ण अनुरोध भी किए हैं. पहला, निगम को वित्त विभाग के अधीन कार्यदायी संस्थाओं की सूची में शामिल किया जाए, ताकि वह औद्योगिक क्षेत्रों के मरम्मत, रखरखाव एवं विकास संबंधी कार्यों का निष्पादन कर सके. दूसरे अनुरोध में निगम ने बताया कि कानपुर में पैलेटेड फैक्ट्री का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है, आगरा में निर्माण कार्य प्रगति पर है तथा लखनऊ में निर्माण कार्य शुरू हो गया है. निगम ने आग्रह किया है कि उसे पूरे प्रदेश में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमियों के लिए पैलेटेड फैक्ट्री निर्माण की अधिकृत संस्था घोषित किया जाए.

लघु औद्योगिक क्षेत्रों के निर्माण और विकास का प्रस्ताव: तीसरे प्रस्ताव में निगम ने कहा है कि वर्तमान में प्रदेश में बड़े औद्योगिक क्षेत्रों का विकास विभिन्न विकास प्राधिकरणों द्वारा किया जा रहा है, लेकिन लघु औद्योगिक आस्थानों के विकास के लिए कोई अधिकृत संस्था नहीं है. ऐसे में निगम को इस कार्य के लिए अधिकृत संस्था के रूप में नामित किया जाए. निगम ने मुख्यमंत्री से इन तीनों प्रस्तावों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है, ताकि प्रदेश में निवेश, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को और अधिक गति मिल सके.