लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार प्रदेश के हर गांव को बसों से जोड़ेगी. इसके लिए प्राइवेट बस ऑपरेटर्स का सहारा लिया जाएगा. गांव में बड़ी बसों के बजाय छोटी बसें चलेंगी. जिससे इन्हें मुड़ने में किसी तरह की कोई दिक्कत न हो. सरकार प्राइवेट बस ऑपरेटरों को टैक्स में राहत भी देगी, जिससे वे बसें चलाने के लिए आगे आ सकें. बसों का किराया भी सस्ता होगा जिससे यात्री इन बसों में सफर का लुफ्त उठा पाएंगें. मंगलवार को योगी आदित्यनाथ सरकार की कैबिनेट ने मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना पर मुहर लगाई है, जिसके बाद सरकार इस तरह की पॉलिसी लागू करेगी.टैक्स फ्री होंगी बसें: उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना 2026 कैबिनेट से स्वीकृत हो गई है. नई पॉलिसी के तहत उत्तर प्रदेश के 59,163 ग्राम सभाओं में बस पहुंचेगी. इसकी विशेषता ये होगी कि यह टैक्स फ्री होंगी. इन बसों से हम टैक्स नहीं लेंगे. बस संचालकों को प्रोत्साहन मिले इसे लेकर उन्हें रियायत भी देंगे. जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी बनेगी. उस कमेटी में SP, CDO, ARTO और RM सदस्य होंगे. गांव में बसे चलेंगी और रात में जाकर वहीं पर हॉल्ट करेंगी.
ये होंगी बस की खासियत: ब्लॉक और तहसील होते हुए सुबह 10 बजे तक जिला मुख्यालय पर पहुंच जाएंगी. किसी को कचहरी जाना होगा. बच्चों को पढ़ने जाना होगा या उस गांव के कोई लोग अपनी खेतीबाड़ी का कोई सामान शहर में बेचने के लिए ले जाना चाहेंगे, तो उसे लेकर आराम से पहुंच सकेंगे. यह छोटी बसें होंगी. लगभग 7 मीटर की होंगी और मैक्सिमम 28 सीटर बसे होंगी. छोटी बसों को इसलिए ले रहे हैं, जिससे ये गांव में टर्न कर सकें. बहुत सारी सड़कें अभी भी हैं, जहां पर बड़ी बसों के टर्न में दिक्कत आएगी, इसलिए इस तरह की बसें लगाई जाएंगी. 4 बजे शाम से यह सभी बसें अपनी दूरी के अनुसार रात 8 बजे तक अपने गांव में पहुंच जाएंगी. कोशिश रहेगी कि जो ड्राइवर कंडक्टर इस बस पर तैनात हो, वह उसी गांव का हो. जिससे उन्हें रुकने में कोई दिक्कत न हो. इससे हर गांव को बस की सुविधा उपलब्ध करा पाएंगे. इसका किराया भी सस्ता रहेगा. जो भी आगे संशोधन करना होगा वह संशोधन भी किया जाएगा, जिससे यात्रियों को सुविधा मिल सके.
कम किराए में सफर कर रहे हैं यात्री: उत्तर प्रदेश के सभी जिलों के गांवों में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा वर्तमान में संचालित की जा रही हैं. हर रीजन के डिपो से 10-10 बसें गांव के लिए संचालित की जा रही हैं. इन बसों का किराया साधारण बसों के किराए की तुलना में 20% सस्ता है, जिससे यात्री बड़ी संख्या में इन बसों से सफर कर रहे हैं. इनका रिस्पांस काफी अच्छा मिल रहा है.
बता दें कि उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के प्रदेश में कुल 20 परिक्षेत्र हैं. इन सभी परिक्षेत्रों से साधारण और एसी बसों के अलावा मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के तहत अलग से सस्ती साधारण बस सेवाएं ग्रामीणों के लिए संचालित हो रही हैं. रोडवेज के बस बेड़े में वर्तमान में 14000 से ज्यादा बसें हैं. इनमें 3000 बसें अनुबंध पर संचालित होती हैं. बसों की श्रेणी की बात की जाए तो साधारण, एसी जनरथ, शताब्दी, वोल्वो और इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं.
ओला-उबर को करना होगा ये जरूरी काम: परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि यूपी में अब ओला-उबर को भी पंजीकरण कराना होगा. परिवहन मंत्री ने मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 93 का जिक्र किया और बताया कि भारत सरकार ने 1 जुलाई 2025 को नियमावली में संशोधन किया है. भारत सरकार के नियम को उत्तर प्रदेश भी अपनाएगा. ओला-उबर पर पहले नियंत्रण नहीं था, लेकिन अब इन्हें भी पंजीकरण कराना पड़ेगा. आवेदन, लाइसेंस और रिन्युअल शुल्क भी देना होगा. कौन गाड़ी चला रहा है, यह अभी तक हम नहीं जान पाते थे. इनका ड्राइवर का मेडिकल, पुलिस वेरिफिकेशन और फिटनेस टेस्ट भी कराएंगे.
परिवहन मंत्री ने बताया कि अब यूपी में बिना पंजीकरण शुल्क, फिटनेस, मेडिकल टेस्ट, पुलिस वेरिफिकेशन के गाड़ी नहीं चला पाएंगे. अधिसूचना जारी होने के बाद यह लागू हो जाएगी. आवेदन की फीस 25 हजार रुपये होगी, जबकि 50-100 या इससे अधिक गाड़ी चलाने वाली कंपनी की लाइसेंसिंग फीस पांच लाख रुपये होगी. रिन्युअल हर पांच साल पर होता रहेगा. रिन्युअल के लिए पांच हजार रुपये देना होगा. परिवहन मंत्री ने बताया कि ऐसा ऐप भी डेवलप करेंगे, जिससे सभी जानकारी पब्लिक डोमेन में रहें. इसके तहत ड्राइवर की सारी जानकारी भी प्राप्त होगी.