उपराष्ट्रपति का नौजवानों से आह्वान: “विकसित भारत @ 2047” के लिए JOB SEEKER नहीं, JOB CREATOR बनें

मेरठ: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मंगलवार को मेरठ के एक निजी विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह में शामिल हुए. जहां उन्होने अपने संबोधन में कहा कि युवाओं को अपनी महत्वाकांक्षाओं को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप ढालने का प्रयास करना चाहिए. विकसित भारत 2047 की परिकल्पना आर्थिक विकास से परे है और इसमें समावेशी विकास शामिल है, जो प्रत्येक गांव और प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचता है. युवा नौकरी देने वाले बनें.

बता दें कि मेरठ शहर के गंगा नगर स्थित आईआईएमटी विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में मेधावी स्टूडेंट को स्वर्ण पदक और पीएचडी की उपाधि प्रदान की. इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आप एक ऐसे भारत में कदम रख रहे हैं जो तेजी से विकसित हो रहा है और उन्होंने कहा कि यहां तमाम अवसर हैं से भरपूर है. वर्तमान समय बुनियादी ढांचे और विकास की अभूतपूर्व पहलों वाला एक निर्णायक दौर है.

सीपी राधाकृष्णन ने देश की पहली सेमी हाईस्पीड रिजनल ट्रेन नमो भारत का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से इस वर्ष की शुरुआत में उद्घाटन की गई नमो भारत ट्रेन और मेरठ मेट्रो से छात्रों और पेशेवरों दोनों के लिए विकास के नए रास्ते खुल रहे हैं. उपराष्ट्रपति ने अपने भाषण में विकसित भारत की परिकल्पना पर जोर दिया. बोले यह परिकल्पना एक राष्ट्रीय मिशन है और इसके लिए युवाओं की ऊर्जा, रचनात्मकता और प्रतिबद्धता की आवश्यकता है.
स्टूडेंट्स से मुखातिब होते हुए बोले राष्ट्र निर्माण में योगदान दें, सत्यनिष्ठा, अनुशासन और सेवा के मूल्यों को बनाए रखें और यह सुनिश्चित करें कि विकास समावेशी, टिकाऊ और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में निहित रहे.

उपराष्ट्रपति ने कहा कि रोजगार चाहने वालों के बजाय रोजगार सृजनकर्ता बनने का भी उन्होंने आह्वान किया, वहीं नवाचार को अपनाने, स्थानीय उद्योगों का समर्थन करने और स्वदेशी समाधानों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया. उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत @ 2047 की परिकल्पना आर्थिक विकास से परे है और इसमें समावेशी विकास शामिल है जो प्रत्येक गांव और प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचता हैउन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में सफलता प्राप्त करने के बाद अपने शिक्षकों और अभिभावकों की कड़ी मेहनत को न भूलने के लिए प्रेरित किया.

सी. राधाकृष्णन ने कहा कि उपराष्ट्रपति ने बेटियों को लेकर कहा कि दीक्षांत समारोहों में अकादमिक सम्मान और पदक पाने वालों की संख्या में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, ये दृढ़ संकल्प, अनुशासन और सहायक परिवेश द्वारा संचालित सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का प्रतिबिंब है. ये प्रयास और कोशिशें प्रगतिशील भारत की ओर प्रेरित कर रही हैं.

इस दौरान समारोह के दौरान 3940 छात्र-छात्राओं को उपाधियां दी गईं. उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णनद्वारा 17 छात्र छात्राओं को भी उपादिया प्रदान की, जिसमें चार विश्वविद्यालय टॉपर और 13 विभिन्न कॉलेजों के टॉपर भी शामिल थे. इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन द्वारा निरंजन पीठाधीश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज, परमार्थ निकेतन आश्रम के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज, महर्षि पाराशर ज्योतिष विद्यालय के डायरेक्टर डॉ. हरी सिंह रावत को डॉक्टरेट की मानद उपाधि पदेकर भी सम्मानित किया.