बड़े काम की है ये मक्खी, लार्वा से बनी हाई प्रोटीन खाद, IIT कानपुर का अनूठा स्टार्टअप

कानपुर: आमतौर पर मक्खी देखते ही हम उसे बीमारी का डर मानकर भगा देते हैं, लेकिन ‘ब्लैक सोल्जर फ्लाई’ (काली सैनिक मक्खी) इससे बिल्कुल अलग है. यह साधारण मक्खियों की तरह नुकसानदेह नहीं, बल्कि अपने अनोखे फायदों के लिए जानी जाती है. इस मक्खी के लार्वा में प्रोटीन की मात्रा 40 से 60 प्रतिशत तक होती है. वहीं, इसका लार्वा अपशिष्ट प्रबंधन के लिए बहुत अधिक कारगर है. यह कचरे को खाद में बदल देता है. आईआईटी कानपुर के इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर में इंक्यूबेट स्टार्टअप इनसेक्ट फार्म ने इसे साबित करके दिखाया है.

इनसेक्ट फॉर्म के संस्थापक अनूप का कहना है कि 2019 तक उन्होंने मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी की, उसके बाद उन्हें तमिलनाडु के वेल्लोर शहर में जानकारी मिली कि निगम की ओर से अपशिष्ट प्रबंधन के लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं. उन्हें कीट-कंपोस्टिंग से अपशिष्ट प्रबंधन की जानकारी थी, जिस पर उन्होंने आईआईटी कानपुर समेत अन्य संस्थानों के विशेषज्ञों से बात करके कीट कंपोस्टिंग से अपशिष्ट प्रबंधन का प्रस्ताव भेज दिया, जिसे वहां से अप्रूवल मिल गया.
इनसेक्ट फॉर्म की मदद से हो रहा कचरा प्रबंधन

उसके बाद अनूप ने काली सैनिक मक्खी के लार्वा तैयार करने के लिए जहां पहले वेल्लोर में अपनी कंपनी स्थापित की, वहीं कंपनी के परिसर में ब्रीडिंग सेंटर बना लिया. मौजूदा समय में तमिलनाडु व चेन्नई के कई शहरों में इनसेक्ट फॉर्म की मदद से कचरा प्रबंधन पर काम किया जा रहा है. इससे जो खाद बन रही है, उसमें पोषक तत्वों की मात्रा सामान्य खाद की तुलना में कई गुना अधिक है. वहीं, मक्खी के लार्वा मछली, मुर्गी व सूअर को चारे के रूप में भी दिए जाते हैं. यह जैविक कचरे को खाद में बदल देते हैं.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कर चुकी हैं सम्मानित

इनसेक्ट फॉर्म के संस्थापक अनूप ने बताया कि उनकी फर्म में रोजाना तीन हजार किलोग्राम कूड़े को खाद में बदलने का काम किया जाता है. उन्हें ‘बेस्ट स्टार्टअप इन वेस्ट मैनेजमेंट’ का अवार्ड राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिल चुका है. आंकड़ों को लेकर उन्होंने बताया कि एक टन जैविक अपशिष्ट प्रसंस्करण से लगभग 120 किलोग्राम जीवित लार्वा और 100 किलोग्राम कीट मल निकलता है. यह कीट मल खाद के रूप में होता है. इसके पौधों में उपयोग करने से उनकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है. अनूप ने कहा कि तमिलनाडु, चेन्नई के बाद अब उनका अगला लक्ष्य आंध्रप्रदेश है, जहां वो जाकर वहां के शहरों में कीट कंपोस्टिंग से अपशिष्ट प्रबंधन का काम शुरू करेंगे.

30 लाख रुपये से अधिक की मिल चुकी है फंडिंग

अनूप ने बताया कि उनके स्टार्टअप को जहां आईआईटी कानपुर से करीब 12.5 लाख रुपये की फंडिंग मिली है. वहीं, अन्य स्रोतों से 20 लाख रुपये बतौर फंड के रूप में मिले है. उन्होंने पूरी फंडिंग से अपना सेटअप तैयार किया है और समय-समय पर आईआईटी कानपुर के कई प्रोफेसर उनके स्टार्टअप को लेकर मार्गदर्शन करते हैं.