मेरठ: PM नरेंद्र मोदी आज गंगा एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करेंगे. 594 किलोमीटर का यह कॉरिडोर कृषि विपणन, क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से भी अहम रोल निभाएगा. औद्योगिक निवेश, लॉजिस्टिक्स और रोजगार को भी इससे बड़ा बूस्ट मिलने की उम्मीद लगाई जा रही है.
प्रदेश सरकार इसे यूपी की लाइफलाइन के तौर पर भी प्रचारित कर रही है. यह एक्सप्रेस-वे सिर्फ 594 किमी का मेगा कॉरिडोर ही नहीं प्रदेश पूर्वी और पश्चिमी एरिया को जोड़ने वाला है.
इससे न केवल प्रदेश की कनेक्टिविटी और भी बेहतर होने जा रही है, बल्कि औद्योगिक निवेश, कृषि विपणन, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से भी इसे गेमचेंजर के तौर पर देखा जा रहा है. इसके शुरु होने को लेकर सरकार का दावा है कि ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को मजबूती मिलेगी.
पीएम मोदी करेंगे लोकार्पण: PM मोदी बुधवार को 11:15 बजे हरदोई पहुंचेंगे. इस दौरान गंगा एक्सप्रेस-वे का उदघाटन करने के साथ ही यूपीडा की ओर से लगने वाली प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे. साथ ही जनसभा भी प्रस्तावित है. सरकारी कार्यक्रम के अनुसार PM मोदी लगभग पौने दो घंटे हरदोई में रहने वाले हैं. 12.55 बजे PM पीएम कार्यक्रम के समापन के बाद वापस दिल्ली लौटेंगे.
पूर्वी-पश्चिमी यूपी को जोड़ेगा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस गंगा एक्सप्रेस-वे को हरी झंडी दिखाएंगे इसका पश्चिमी छोर मेरठ है. मेरठ के अलावा यह एक्सप्रेस-वे हापुड़, बुलंद शहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ जैसे जिलों को जोड़ते हुए प्रयागराज तक पहुंचता है.
माना जा रहा है कि इस हाई स्पीड एक्सप्रेस-वे के चालू होने से इन क्षेत्रों के बीच यात्रा करना आसान होगा. दूरी घटेगी और समय बचेगा. सफर सुरक्षित और सुविधाजनक होगा. इसके साथ ही माल परिवहन की लागत में कमी आने से उद्योगों और व्यापारियों को भी सीधा लाभ मिलेगा.
PPP मॉडल पर विकास: गंगा एक्सप्रेस-वे को पीपीपी (DBFOT) मॉडल पर विकसित किया गया है. यह सार्वजनिक-निजी भागीदारी का एक उदाहरण भी है. वर्तमान में यह 6 लेन में तैयार किया गया है, लेकिन भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए इस तरह से इसे विकसित किया गया है कि आवश्यकता के अनुसार इसे 8 लेन तक किया जा सकेगा. इसे 120 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड के साथ तैयार किया गया है.
एयरस्ट्रिप भी है तैयार: इस एक्सप्रेस-वे के रूट पर शाहजहांपुर जिले की सीमा में लगभग 3.2 किलोमीटर लंबी एयरस्ट्रिप भी बनाई गई है. इस पर कि किसी भी आपात स्थिति में वायुसेना के विमान उतारने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकेगा. वहीं पूरे रूट को इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS), CCTV निगरानी, इमरजेंसी कॉल बॉक्स, एम्बुलेंस और पेट्रोलिंग की व्यवस्था से लैस किया गया है.
सुगम और सुरक्षित यात्रा: इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स (IMLC) गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित किए जा रहे हैं, जो कि इस परियोजना की सबसे बड़ी ताकत हैं.
इन क्लस्टर्स में गंगा एक्सप्रेस-वे के किनारे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, वेयर हाउस, कोल्ड स्टोरेज, फूड प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स हब स्थापित होना प्रस्तावित है. प्रदेश सरकार के द कैपिटल सब्सिडी, SGST रिंबर्समेंट, स्टाम्प ड्यूटी छूट, पावर इंसेंटिव और पीले टॉप-अप जैसी सुविधाएं निवेशकों को देने का प्रावधान भी योगी सरकार की तरफ से है.
गंगा एक्सप्रेसवे को प्रदेश के अन्य प्रमुख एक्सप्रेस-वे जैसे पूर्वांचल, आगरा-लखनऊ, बुंदेलखंड और गोरखपुर लिंक से जोड़ने के प्रयास हो रहे हैं. इसको लेकर योगी सरकार पहले ही बजट में प्रावधान कर चुकी है. इससे निश्चित ही उत्तर प्रदेश में एक इंटरकनेक्टेड एक्सप्रेस-वे नेटवर्क तैयार होने की भी उम्मीद है.
बेहतर कनेक्टिविटी से न केवल लोगों की आवाजाही आसान होने जा रही है, बल्कि माल ढुलाई तेज सुलभ और सस्ती भी हो जाएगी. यह लॉजिस्टिक्स सेक्टर को शक्ति देगा. एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर कृषि आधारित उद्योग, मंडियां, कोल्ड स्टोरेज और वेयर हाउस विकसित किए जाने प्रस्तावित हैं.
इससे किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार मिलेगा और उन्हें उचित मूल्य प्राप्त होगा. इसके साथ ही पिछड़े क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी. गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से निश्चित ही हजारों लोगों को रोजगार मिला है. आगे भी लाखों रोजगार मिलेंगे.
IM IMLC और औद्योगिक कॉरिडोर के विकसित होने से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की रुचि बढ़ेगी. वहीं यह परियोजना उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर इकॉनामी की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.