काशी विश्वनाथ में स्थापित हुआ सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का प्रतिरूप, सीएम योगी ने दिया बड़ा संदेश

वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात पहुंचकर मंदिर के जीणोद्धार के 75 वर्ष पूर्ण होने पर सोमनाथ मंदिर में विशेष शिखर कुम्भाभिषेक आयोजन में शामिल हो रहे हैं. वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल श्री काशी विश्वनाथ मंदिर से इस कार्यक्रम से सीधे जुड़े हैं और विश्वनाथ मंदिर में विशेष पूजन के बाद यहां आयोजित सोमनाथ संकल्प पूजन कार्यक्रम में शामिल भी हुए हैं.

राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने बाबा विश्वनाथ की विशेष पूजा की है और उसके बाद यहां के त्रंबकेश्वर हॉल में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल हुए हैं. यहां पर भी विश्वनाथ मंदिर परिसर में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के प्रतिरूप शिवलिंग की स्थापना के बाद इसके पूजन में भी मुख्यमंत्री और राज्यपाल शामिल हुए हैं. त्रंबकेश्वर हॉल में श्री सोमनाथ संकल्प पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया है.

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 दिसंबर 2021 को काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर लोकार्पण के दौरान 3 घंटे से अधिक समय मंदिर में बिताया था और सोमवार को मुख्यमंत्री और राज्यपाल 3 घंटे तक का समय बिता रहे हैं. पूजन पाठ के साथ यहां पर आयोजित विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी शामिल हो रहे हैं.

त्रंबकेश्वर हॉल में श्री सोमनाथ संकल्प पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. यहां इस विशेष अनुष्ठान को लाइव दिखाने के साथ ही बीएचयू के छात्रों द्वारा तैयार सोमनाथ की प्रतिकृति ज्योतिर्लिंग की स्थापना के साथ जलाभिषेक कर पूजन भी किया गया.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मौके पर कहा कि द्वादश ज्योतिर्लिंग में प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ महादेव के पुनर्स्थापना के अमृत पर्व और सोमनाथ महादेव मंदिर के इस स्वाभिमान पर्व के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री का मार्गदर्शन और प्रेरणा पूरे देशवासियों को प्राप्त हो रहा है. आज हम सब एक भारत, श्रेष्ठ भारत की संकल्पना को साकार होता देख रहे हैं. जिसका सरकार रूप सौराष्ट्र में भगवान सोमनाथ के भव्य मंदिर की पुनर्स्थापना और नए रूप में देखने को मिल रहा है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम भारतीय सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक परंपरा, राष्ट्रीय आत्म गौरव के पुनर्जागरण का एक शंखनाद है. सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का यह आयोजन है. यह हमें भारत की जड़ों से जोड़ने का एक अभिनव प्रयास है. काशी विश्वनाथ धाम में आयोजन अपने आप में भारत की सनातन परंपरा सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक एकात्मा का भी प्रतीक है. काशी और सोमनाथ दोनों ही पवित्र हैं. एक उत्तर में पवित्र गंगा के तट पर बाबा विश्वनाथ धाम और दूसरा पश्चिमी भारत में सागर के तट पर स्थित प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ महादेव का है.

सीएम ने कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत की सभ्यता के उस अमर आदर्श का प्रतीक है, जहां धर्म, संस्कृति, इतिहास और राष्ट्रीय अस्मिता एकात्मा भाव से अभिव्यक्त होते हैं. सोमनाथ और काशी दोनों ही इतिहास से एक संदेश देने वाले हैं कि सनातन संस्कृति पर आक्रमण हो सकते हैं, लेकिन उसे पराजित नहीं किया जा सकता, विनाश क्षणिक होता है, जबकि सृजन शाश्वत होता है. 1000 वर्ष पहले महमूद गजनवी के आक्रमण सहित विदेशी आक्रांताओं ने सोमनाथ मंदिर पर 17 बार आक्रमण किया. उसके वैभव को खंडित करने का प्रयास किया. उन्हें यह भ्रम था कि मूर्ति खंडित करके और इसके वैभव को लूटकर भारत की आत्मा को सदैव के लिए समाप्त कर सकते हैं. यह केवल सोमनाथ महादेव के मंदिर के साथ नहीं हुआ, भारत के अंदर हजारों सनातन के प्रतीक पवित्र स्थलों के प्रति और काशी विश्वनाथ धाम भी शामिल है.

उन्होंने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के मौके पर उत्तर प्रदेश के लोगों को हर श्रद्धालु को जो भारत की एकता के प्रति द्वादश ज्योतिर्लिंगों के पावन परंपरा के प्रति श्रद्धा रखता है, बधाई देता हूं.