नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पश्चिम बंगाल में शानदार जीत दर्ज करते हुए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार के 15 साल के शासन का अंत कर दिया और इसके साथ ही 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भाजपा ने नौ राज्यों में पहली बार मुख्यमंत्री पद हासिल किया है.
यह सफर 2014 में हरियाणा और महाराष्ट्र से शुरू हुआ. इसके बाद असम (2016), अरुणाचल प्रदेश (2016), मणिपुर (2017), त्रिपुरा (2018), ओडिशा (2024), बिहार (2026) और अब पश्चिम बंगाल में पार्टी ने पहली बार मुख्यमंत्री पद प्राप्त किया.
हरियाणा में भाजपा ने पहली बार अपने दम पर सरकार बनायी और मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया. महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद भाजपा ने महायुति गठबंधन के सहयोगियों के साथ सरकार बनायी और देवेंद्र फडणवीस राज्य में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने.
भाजपा ने 2016 में पूर्वोत्तर में अपनी पकड़ मजबूत करते हुए असम में जीत दर्ज की, जहां सर्बानंद सोनोवाल राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बने. तब से भाजपा असम में लगातार सत्ता में बनी हुई है और अप्रैल में हुए चुनाव सहित लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीत चुकी है.
उसी वर्ष 2016 में भाजपा ने अरुणाचल प्रदेश में बड़े राजनीतिक पुनर्गठन के बाद अपनी पहली पूर्ण सरकार बनाई. जुलाई 2016 में कांग्रेस नेता पेमा खांडू लंबे राजनीतिक संकट के बीच मुख्यमंत्री बने, लेकिन सितंबर में वह और कांग्रेस के अधिकतर विधायक भाजपा के सहयोगी दल ‘पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल’ (पीपीए) में शामिल हो गए.
कुछ महीनों बाद दिसंबर 2016 में खांडू 33 विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए, जिससे पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला और राज्य में उसकी पहली स्थिर सरकार बनी. भाजपा ने 2017 में मणिपुर में चुनाव के बाद नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी), नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) और अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन कर सरकार बनाई और एन. बीरेन सिंह को मुख्यमंत्री बनाया.
भारतीय जनता पार्टी ने 2018 में त्रिपुरा में वाम मोर्चे के दशकों पुराने शासन को समाप्त कर बिप्लव कुमार देव के नेतृत्व में अपनी पहली सरकार बनाई.
उसने 2024 में पूर्वी भारत में एक और बड़ी सफलता हासिल करते हुए ओडिशा में बीजू जनता दल (बीजद) को हराया. यहां मोहन चरण माझी राज्य के भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने और नवीन पटनायक का 24 साल का शासन समाप्त हुआ.
बिहार में भाजपा लंबे समय से नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकारों का हिस्सा रही, लेकिन अपने मुख्यमंत्री के लिए उसे यहां 2026 तक इंतजार करना पड़ा.
दो दशकों से अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहने के बाद नीतीश कुमार ने इस वर्ष इस्तीफा देकर राज्यसभा का रुख किया. उनके पद छोड़ने के बाद सम्राट चौधरी के रूप में राज्य को भाजपा से पहला मुख्यमंत्री मिला.
हालिया चुनावों में पश्चिम बंगाल में जीत के साथ भाजपा ने अब उस राज्य में भी सरकार बना ली है जिसे लंबे समय तक पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से दुर्गम माना जाता था. पार्टी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतीं. भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि मोदी के नेतृत्व में पार्टी का विस्तार उसके सुशासन मॉडल और देशभर में बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है.
उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा और राजग ने सुशासन, प्रदर्शन और वादों को पूरा करने के आधार पर पूरे देश में अपना राजनीतिक विस्तार किया है। जिन राज्यों में पहले कभी भाजपा सरकार या भाजपा मुख्यमंत्री नहीं रहा, वहां भी मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भाजपा सरकारें चुनी गईं.’’
पूनावाला ने पूर्वोत्तर भारत में भाजपा के उभार को “ऐतिहासिक” बताते हुए कहा कि इससे क्षेत्रीय असंतुलन दूर होगा. उन्होंने कहा, ‘‘इससे कांग्रेस शासन के दौरान पूर्वोत्तर भारत को झेलनी पड़ी ऐतिहासिक उपेक्षा और असंतुलन को दूर करने में मदद मिलेगी तथा संतुलित विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार को बढ़ावा मिलेगा.’’
उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उसका राजनीतिक दायरा सिमट रहा है, जबकि भाजपा-राजग लगातार विस्तार कर रहे हैं.
पूनावाला ने कहा, ‘‘आज भाजपा-राजग की देशभर में लगभग 21-22 सरकारें हैं। गठबंधन का शासन देश की करीब 78 प्रतिशत आबादी और लगभग 72 प्रतिशत भूभाग तक फैला हुआ है.’’
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन ए. सिन्हा ने पार्टी के विस्तार को उसके राजनीतिक सफर का ‘‘स्वर्णिम दौर’’ बताया. उन्होंने कहा, ‘‘यह भाजपा की यात्रा का स्वर्णिम चरण रहा है, क्योंकि हमने उन भौगोलिक क्षेत्रों में प्रवेश किया है जिन्हें कभी पार्टी के लिए अभेद्य या बेहद कठिन माना जाता था.’’
सिन्हा ने भाजपा के उभार का श्रेय सरकार के फैसलों और चुनावी वादों को पूरा करने को दिया. उन्होंने कहा, ‘‘चाहे अनुच्छेद 370 हटाना हो, नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लागू करना हो या राम मंदिर का निर्माण, भाजपा ने दिखाया है कि वह अपने वादे पूरे करती है. यही कारण है कि जो राज्य कभी भाजपा के प्रभाव से अछूते थे, वे अब पार्टी को स्वीकार कर रहे हैं.’’
उन्होंने दावा किया कि अब भाजपा की देश के अधिकतर हिस्सों में मजबूत मौजूदगी है. सिन्हा ने कहा, ‘‘दो दक्षिणी राज्यों तमिलनाडु और केरल को छोड़कर भाजपा ने पूरे देश में मजबूत उपस्थिति स्थापित कर ली है और ये राज्य भी पार्टी की भविष्य की विस्तार योजनाओं का हिस्सा हैं.’’