प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बरतने वाले अफसरों और डॉक्टरों पर प्रशासन का बड़ा चाबुक चला है. जिले में आयुष्मान कार्ड बनाने की सुस्त रफ्तार और जननी सुरक्षा योजना में खराब परफॉर्मेंस को लेकर जिलाधिकारी (DM) मनीष कुमार वर्मा का पारा चढ़ गया. समीक्षा बैठक में कड़ा रुख अपनाते हुए डीएम ने साफ लहजे में चेतावनी दी कि यदि हर दिन औसतन 200 गोल्डन कार्ड नहीं बने, तो जिम्मेदार चिकित्सा अधीक्षक सीधे नपेंगे. वहीं, लाभार्थियों के भुगतान में लापरवाही मिलने पर मुख्य विकास अधिकारी (CDO) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सभी ब्लॉक लेखा प्रबंधकों का वेतन रोकने का फरमान सुना दिया है.
प्रतिदिन 200 कार्ड का टारगेट, लापरवाही पर सीधे ऐक्शन
जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने आयुष्मान कार्ड की जनपद में खराब रैंकिंग पर सख्त नाराजगी जताई. उन्होंने सभी चिकित्सा अधीक्षकों को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि जनपद प्रयागराज को प्रदेश में प्रथम स्थान पर लाना है इसके लिए प्रतिदिन औसतन 200 गोल्डन कार्ड बनाना अनिवार्य होगा, ऐसा न होने पर संबंधित चिकित्सा अधीक्षकों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. जिलाधिकारी ने सीडीओ हर्षिका सिंह को इस प्रगति की रोजाना मॉनिटरिंग करने की जिम्मेदारी सौंपी है.
इन 7 ब्लॉकों में सरकारी प्रसव बढ़ाने के सख्त निर्देश
बैठक में जननी सुरक्षा योजना (JSY) के तहत संस्थागत प्रसव की ब्लॉकवार समीक्षा की गई। सबसे कम उपलब्धि वाले 7 ब्लॉकों—रामनगर, सोरांव, बहादुरपुर, चाका, कौंधियारा, सैदाबाद और मांडा के चिकित्सा अधीक्षकों को टारगेट दिया गया है. सीडीओ ने निर्देश दिया कि आशा बहुओं के माध्यम से क्षेत्र की सभी गर्भवती महिलाओं की सूची तैयार कर उनका शत-प्रतिशत प्रसव सरकारी अस्पतालों में ही कराया जाए.
लापरवाह महिला डॉक्टरों पर गिरेगी गाज
सीएचसी कोरांव और हंडिया में अप्रैल महीने के दौरान सिर्फ 6-6 सिजेरियन प्रसव होने पर सीडीओ ने गहरी नाराजगी जताई. उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को निर्देश दिया कि जो स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologists) सिजेरियन प्रसव करने में रुचि नहीं ले रही हैं, उनके खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.
गायब डॉक्टरों की संविदा समाप्त, वेंडर ब्लैकलिस्ट
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की समीक्षा के दौरान डीएम ने ई-संजीवनी और ओपीडी सेवाओं की रैंडम जांच के आदेश दिए. उन्होंने लंबे समय से बिना सूचना गायब चल रहे कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (CHO) की संविदा तुरंत समाप्त करने का निर्देश दिया. इसके साथ ही, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत मेडिकल मोबाइल टीमों को समय पर गाड़ियां न देने वाले वेंडर को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट (काली सूची में डालना) करते हुए नया टेंडर निकालने का आदेश जारी किया गया.
प्रयागराज जिला स्वास्थ्य समिति की इस बैठक से साफ है कि प्रशासन अब स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है. ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं (जैसे संस्थागत प्रसव और आयुष्मान कार्ड) को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए सीधे तौर पर अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दी गई है.
अधिकारियों का वेतन रोकने, वेंडर को ब्लैकलिस्ट करने और लापरवाही पर सीधे सेवा समाप्ति (सस्पेंशन) की चेतावनी देना यह दर्शाता है कि सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए सख्त प्रशासनिक कदम उठाए जा रहे हैं. आने वाले दिनों में इन कड़े निर्देशों का असर जनपद की स्वास्थ्य रैंकिंग और आम जनता को मिलने वाली सहूलियतों पर सकारात्मक रूप से देखने को मिल सकता है.