लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार कारोबार सुगमता बढ़ाने के लिए उद्योगों की मंजूरी प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बना रही है। डीरेगुलेशन-2.0 के तहत सिंगल विंडो सिस्टम में प्रस्तावित सुधारों के अंतर्गत निवेश मित्र 3.0 में आवेदन से लेकर उद्योग में व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने तक की पूरी प्रक्रिया का रीयल टाइम मॉनिटरिंग तंत्र लागू कर दिया गया है। इसके माध्यम से निवेशकों की फाइल की पूरी यात्रा ऑनलाइन दर्ज होगी, जिससे लंबित मामलों, अनावश्यक आपत्तियों और विभागीय देरी की तत्काल पहचान संभव होगी।
सिंगापुर के गोबिजनेस मॉडल से प्रेरित व्यवस्था
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से केवल आवेदन निस्तारण की गति ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि यह भी स्पष्ट होगा कि किस विभाग या किस प्रकार की अनुमति में सर्वाधिक समय लग रहा है। बार-बार उठने वाली आपत्तियों और अस्वीकृति के कारणों का विश्लेषण कर संबंधित प्रक्रियाओं को और सरल बनाया जाएगा। निर्धारित समय से अधिक लंबित रहने वाले आवेदनों की तत्काल पहचान होने से अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी। इससे निवेशकों को विभिन्न विभागों के चक्कर भी कम लगाने पड़ेंगे।
प्रदेश सरकार ने इस सुधार के लिए सिंगापुर के गोबिजनेस मॉडल को सर्वोत्तम उदाहरण माना है। वहां व्यवसाय पंजीकरण और लाइसेंस संबंधी सभी सेवाएं एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से संचालित होती हैं। औसत निस्तारण समय सार्वजनिक किया जाता है और उपयोगकर्ताओं की शिकायतों व प्रश्नों का विश्लेषण कर प्रक्रियाओं में लगातार सुधार किया जाता है।
इसी मॉडल से प्रेरित होकर निवेश मित्र 3.0 को केवल ऑनलाइन आवेदन पोर्टल नहीं, बल्कि एक इंटेलिजेंट मॉनिटरिंग सिस्टम के रूप में विकसित किया गया है। अधिकारियों के अनुसार स्मार्ट डैशबोर्ड के माध्यम से शासन स्तर पर भी नियमित समीक्षा संभव होगी, जिससे उद्योगों को मंजूरी देने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और जवाबदेह बनेगी। वहीं, निवेश प्रस्तावों को शीघ्र स्वीकृति मिलने से उद्योग तेजी से उत्पादन शुरू कर सकेंगे।