लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में ‘मिशन 2027’ की बिसात बिछ चुकी है. पिछले दो साल से खाली पड़े भाजपा के सबसे महत्वपूर्ण सांगठनिक पद पर केंद्रीय नेतृत्व ने महाराष्ट्र के कद्दावर और बेहद सुलझे हुए रणनीतिकार विनोद तावड़े को यूपी का नया प्रभारी नियुक्त कर दिया है. उनके साथ गुजरात के जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है. राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा घोषित इस नई टीम का सीधा और साफ संदेश है यूपी भाजपा में आंतरिक असंतोष का खात्मा, संगठन और सरकार के बीच पूर्ण समन्वय और विपक्षी ‘PDA’ नैरेटिव को पूरी तरह ध्वस्त करना. दिल्ली ने एक ऐसे चेहरे पर भरोसा जताया है जो उत्तर प्रदेश की गुटीय राजनीति से कोसों दूर रहकर सीधे केंद्रीय हाईकमान के एजेंडे को जमीन पर लागू कर सके. पेश है संवाददाता अखिल पांडेय की विशेष रिपोर्ट.
दो साल महामंथन के बाद फैसला: पिछले लगभग दो साल से खाली चल रहे यूपी भाजपा प्रभारी पद पर हाल ही में भारतीय जनता पार्टी ने विनोद तावड़े की नियुक्ति की है. इससे पहले राधा मोहन सिंह उत्तर प्रदेश प्रभारी थे. कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें कार्यवाहक प्रभारी का दायित्व सौंपा गया था जिसे वे निभा रहे थे. अब बीजेपी आलाकमान ने दो साल बाद कार्यवाहक के स्थान पर पार्टी के नियमित प्रभारी के तौर पर विनोद तावड़े को प्रभार सौंपा है. उत्तर प्रदेश के प्रभारी के तौर पर अमित शाह ने जब कमान संभाली थी तो भारतीय जनता पार्टी का यूपी में सत्ता का सूखा समाप्त हुआ. पिछले दो बार से यूपी में भारतीय जनता पार्टी की लगातार सरकार बन रही है. अब उत्तर प्रदेश में पार्टी काफी मजबूत है और 2022 के विधानसभा चुनाव में मिली जीत के बाद 2027 में भी हैट्रिक लगाने का पार्टी के नेता दावा कर रहे हैं.
क्या है लक्ष्य: राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की घोषित इस नई सांगठनिक टीम का सीधा लक्ष्य यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में हैट्रिक लगाना है. महाराष्ट्र के लो-प्रोफाइल रणनीतिकार तावड़े की गुटीय राजनीति से तटस्थ छवि का उत्तर प्रदेश भाजपा में उपयोग करने की तैयारी है. इसके साथ ही गुजरात के जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी बनाकर संगठन को बूथ स्तर पर ‘गुजरात मॉडल’ से री-चार्ज करने की तैयारी है. गुजरात में लगातार कई दशक से भारतीय जनता पार्टी सत्ता पर काबिज है. यहां के रणनीतिकार हर राज्य में सफल होते रहे हैं. ऐसे में जगदीश ईश्वरभाई पटेल को भी पार्टी ने यूपी में गुजरात मॉडल लागू कर सत्ता में फिर से वापसी करने की जिम्मेदारी सौंपी है.
तावड़े और पटेल का क्या काम?:
- टिकट काटने जैसे कड़े फैसले लेने की छूट
- दिल्ली-लखनऊ के बीच सेतु
- सरकार और संगठन में पूर्ण सामंजस्य
- आंतरिक असंतोष और गुटबाजी का अंत
- गठबंधन और सूक्ष्म संकट प्रबंधन
- PDA नैरेटिव की काट
- सपा-कांग्रेस के सोशल इंजीनियरिंग को भेदना
- गैर-यादव ओबीसी और रूठे वोटर्स को साधना
- पन्ना प्रमुख और बूथ स्तर की री-बूट
- एंटी-इन्कंबेंसी का मुकाबला
- 2027 की चुनावी हैट्रिक की चुनौती
समाप्त होगी संवादहीनता: उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े लखनऊ (राज्य नेतृत्व) और दिल्ली (केंद्रीय नेतृत्व) के बीच संवादहीनता को दूर करेंगे. कई बार ऐसी खबरें सामने आती है कि राज्य और केंद्र में कम्युनिकेशन गैप है. इसके चलते तमाम सारे गलतफहमियां कार्यकर्ताओं के बीच पनपती हैं जिससे पार्टी को नुकसान उठाना पड़ता है, लेकिन अब आलाकमान ने केंद्रीय नेतृत्व के करीबी विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में भेजकर इस संवादहीनता को दूर करने वाला कदम उठाया है. अब भारतीय जनता पार्टी के राज्य संगठन और केंद्रीय आलाकमान में किसी भी बात या मुद्दे को लेकर किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी. पार्टी नेताओं का मानना है कि इससे आगामी चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को पूरा फायदा मिलेगा.
कांग्रेस पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अंशू अवस्थी का कहना है कि विनोद तावड़े की नियुक्ति भारतीय जनता पार्टी का आंतरिक मामला है. उत्तर प्रदेश का चुनाव इंडिया गठबंधन बनाम एनडीए होगा. ऐसे में विनोद तावड़े संगठन की बात भले करें, लेकिन उनका कोई फर्क नहीं पड़ेगा. पहले जो प्रभारी थे जिन्होंने 73 सीटें जिताई थीं और उसके बाद 65 लोकसभा सीटें आई थीं, लेकिन उसके बाद इस उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को 33 सीटों पर समेट दिया. विनोद तावड़े आए या कोई और आए, उत्तर प्रदेश की जनता इंडिया गठबंधन को वोट करेगी. योगी आदित्यनाथ के सामने सभी नतमस्तक हैं. जब उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष नतमस्तक हैं तो विनोद तावडे तो उनकी कमेटी में महामंत्री हैं, क्या वह योगी आदित्यनाथ के सामने सीधे खड़े हो पाएंगे?- अंशू अवस्थी, प्रवक्ता, कांग्रेस
सोशल इंजीनियरिंग: विनोद तावड़े पिछड़ा वर्ग से आते हैं और उत्तर प्रदेश के केंद्र बिंदु में इस समय पिछड़ा वर्ग को लेकर हर पार्टी राजनीति करने में जुटी है. भारतीय जनता पार्टी की भी रणनीति यही है कि पिछड़ा वर्ग से आने वाले विनोद तावड़े उत्तर प्रदेश के गैर यादव पिछड़ा वर्ग निषाद, सैनी, मौर्य राजभर और कुर्मी जैसे बड़े वर्ग को एकजुट करें. जहां तक ओबीसी मैं यादव की बात है तो समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव इस वोट बैंक पर अपनी मजबूत पकड़ होने का दावा करते हैं. हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने इसमें भी सेंध लगाने में सफलता पाई है, जिसके पिछले विधानसभा चुनाव उदाहरण हैं.
पीडीए की काट में विनोद तावडे का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि पीडीए अपने आप में कंफ्यूज है. विनोद तावड़े प्रभारी के रूप में आए हैं, लेकिन यहां की मूल राजनीति जो है अमित शाह ही देखेंगे. अमित शाह के बाद राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल देखेंगे. महाराष्ट्र की राजनीति और यूपी की राजनीति में बहुत फर्क है. पीडीए का विनोद तावडे से कोई मतलब नहीं है. यूपी के लोग जानते भी नहीं हैं. भाजपा केंद्र से सब कुछ होता है, प्रभारी का मतलब नहीं है. देश में सबसे बड़ा अगर पिछड़ा वर्ग का नेता है तो वह देश का प्रधानमंत्री ही है. ऐसे में उत्तर प्रदेश में केंद्र से किसी भी नेता को भेजा जाए, लेकिन कमान केंद्र के हाथ में ही रहेगी.- विजय शंकर पंकज, राजनीतिक विश्लेषक
माइक्रो-मैनेजमेंट: जगदीश ईश्वर भाई पटेल को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उत्तर प्रदेश में सह प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी है. गुजरात की तर्ज पर पन्ना प्रमुख और बूथ स्तर के कैडर को सक्रिय करने की रणनीति बनाएंगे. उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी लगातार ऐसे अभियान चलाती रहती है जिससे बूथ मैनेजमेंट को बेहतर किया जा सके. पन्ना प्रमुखों को जिम्मेदारी देकर लगातार संगठन को सक्रिय रखने की कोशिश की जाती है अब जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कुछ ही माह शेष हैं. लिहाजा, बूथ स्तर के कैडर को सक्रिय करने के साथ ही पन्ना प्रमुखों के साथ गुजरात की तर्ज पर यूपी में जगदीश ईश्वर भाई पटेल सह प्रभारी के तौर पर मजबूत करने में जुटेंगे, क्योंकि किसी भी चुनाव में जिस पार्टी का बूथ मजबूत होता है वहीं से चुनावी नतीजे अपने पक्ष में आने की उम्मीद बढ़ जाती है.
आने वाले समय में भारतीय जनता पार्टी ऐसे यहां से विदा हो जाएगी जैसे गधे के सिर से सींग गायब हो जाते हैं. गुजरात और महाराष्ट्र मॉडल यूपी में चलने वाला नहीं है. इन्होंने जिस तरह की चोरी की है राम मंदिर की चोरी, आस्था की चोरी की है. इन्होंने भगवान तक को नहीं छोड़ा. मुझे लगता है वर्तमान सरकार के जो मुखिया हैं वह भी इसमें शामिल है. इन्होंने आस्था को ठेस पहुंचाई है भगवान राम इन्हें मिट्टी में मिलाने का काम करेंगे.- डॉ. मुकेश वर्मा, विधायक, समाजवादी पार्टी
बीजेपी ने विनोद तावड़े और जगदीश पटेल को यूपी की कमान सौंपकर यह साफ कर दिया है कि वह 2027 के चुनाव को किसी भी हाल में हल्के में नहीं ले रही है. चुनौतियों का पहाड़ बड़ा है, चाहे वह भीतर का असंतोष हो या बाहर विपक्ष का सोशल इंजीनियरिंग नैरेटिव.