हापुड़: प्रयागराज के कौशांबी के मनौरी क्षेत्र में 31 अगस्त को पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट की जांच अब हापुड़ की हैंडलूम नगरी पिलखुवा तक पहुंच गई है. रविवार देर रात कौशांबी पुलिस की टीम पिलखुवा पहुंची और सर्राफ धर्मेंद्र वर्मा और उनके बेटे गौरव से पूछताछ की. पूछताछ के बाद पुलिस ने धर्मेंद्र वर्मा को छोड़ दिया, जबकि उनके बेटे गौरव को अपने साथ कौशांबी ले गई.
पुलिस की इस कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर भी मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई. टीम ने सर्राफ से कैमिकल की आपूर्ति से संबंधित जानकारी जुटाई. पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि वर्ष 2024 में कैमिकल किसके नाम पर और किस उद्देश्य से उपलब्ध कराया गया था. साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि संबंधित रसायन पटाखा निर्माण तक कैसे पहुंचा.
थोक कैमिकल बिक्री का लाइसेंस मिला: जानकारी के अनुसार, धर्मेंद्र वर्मा के पास थोक में रसायन बिक्री का लाइसेंस है. लाइसेंस के तहत रसायन की आपूर्ति औद्योगिक इकाइयों के लिए की जाती है. कौशांबी पुलिस इसी बिंदु को लेकर वर्ष 2024 में हुई आपूर्ति से संबंधित जानकारी जुटा रही है.
जांच में प्रारंभिक जानकारी के आधार पर बड़ी मात्रा में रसायन की व्यवस्था कराने में सर्राफ धर्मेंद्र वर्मा की मध्यस्थता की बात सामने आई है. इसी संबंध में पुलिस ने पिलखुवा पहुंचकर उनसे और उनके बेटे से पूछताछ की.
बेटे को कौशांबी ले गई टीम: पूछताछ के बाद धर्मेंद्र वर्मा को पुलिस ने छोड़ दिया. वहीं उनके बेटे गौरव को टीम अपने साथ कौशांबी ले गई. वहां उससे मामले से संबंधित आगे की पूछताछ की जा रही है. पुलिस मामले से जुड़े अन्य तथ्यों और रसायन की आपूर्ति से संबंधित जानकारी जुटा रही है.
पिलखुवा थाना प्रभारी मनोज बालियान ने बताया कि कौशांबी पुलिस देर रात जिला हापुड़ के पिलखुवा आई थी. टीम ने पिलखुवा से एक सर्राफ को हिरासत में लेकर पूछताछ की. प्रारंभिक जानकारी में रसायन उपलब्ध कराने में मध्यस्थता की बात सामने आई है. मामले में कौशांबी पुलिस आगे की जानकारी जुटा रही है.
हापुड़ के पिलखुवा का रहने वाला दुर्दान्त आतंकवादी ओर 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट का आरोपी अब्दुल करीम टुंडा ने भी इस केमिकल के साथ अन्य केमिकलों की सहायता से ही बम बनाकर सीरियल ब्लास्ट किए थे. इस केमिकल का प्रयोग चादरों की छपाई में किया जाता है. टुंडा का नाम इसके बाद कई ब्लास्ट में आया था. हालांकि फिलहाल अब्दुल करीम टुंडे जेल में है. टुंडा का नाम पाकिस्तान ओर आईएसआई के साथ भी जुड़ता रहा है.
हालांकि, कौशांबी विस्फोट मामले में अब तक सामने आई जांच का अब्दुल करीम टुंडा से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं बताया गया है. उसका उल्लेख केवल पिलखुवा क्षेत्र और रसायनों के दुरुपयोग के ऐतिहासिक संदर्भ के रूप में किया जा रहा है.