आगरा:आगरा के जिलाधिकारी मनीष बंसल ने परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा के स्तर को सुधारने और व्यवस्थाओं को पारदर्शी बनाने के लिए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला टास्क फोर्स (डीटीएफ) की समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि अब खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) को केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर सक्रिय होना होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि जनपद के सभी बीईओ प्रतिदिन कम से कम एक स्कूल का अनिवार्य रूप से निरीक्षण करेंगे और बच्चों के साथ बैठकर मिड-डे मील ग्रहण करेंगे। भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण के तत्काल बाद उन्हें फोटो भी साझा करनी होगी।
बैठक में जिलाधिकारी ने स्कूल चलो अभियान के तहत नामांकन लक्ष्यों की समीक्षा की। नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि नवीन सत्र में कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों और अधिकारियों को घर-घर जाकर अभिभावकों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। वहीं, बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत प्रवेश प्रक्रिया में अड़चन डालने वाले निजी स्कूलों पर जिलाधिकारी का चाबुक चला। जनपद में अलॉट किए गए 8112 बच्चों में से अब तक 5899 का ही प्रवेश हो पाया है।
जिलाधिकारी ने उन 18 निजी स्कूलों के विरुद्ध प्रभावी विधिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं जिनके खिलाफ नोटिस जारी किया गया है। साथ ही शेष बच्चों का शत-प्रतिशत प्रवेश सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक के अंत में ऑपरेशन कायाकल्प की समीक्षा करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद वह स्वयं स्कूलों का औचक निरीक्षण करेंगे और यदि किसी स्कूल में शैक्षिक सुधार या मूलभूत सुविधाओं में कमी पाई गई, तो संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह, बीएसए जितेंद्र कुमार गोंड और सभी बीईओ उपस्थित रहे। कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में कम उपस्थिति पर फटकार जिलाधिकारी ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्राओं और शिक्षकों की कम उपस्थिति के साथ-साथ लक्ष्यों के सापेक्ष कम नामांकन पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया कि 30 अप्रैल तक प्रेरणा और यूडाइस पोर्टल पर अगली कक्षा में प्रोन्नति (कक्षोन्नति) की शत-प्रतिशत फीडिंग पूरी की जाए। साथ ही शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए सभी नामांकित बच्चों को पाठ्य पुस्तकों का वितरण सुनिश्चित कर पेरेंट्स-टीचर मीटिंग में अभिभावकों के हस्ताक्षर कराए जाएं।