कौन हैं शोभिनव सत्या? ‘हनुमान अंश’ में निभाया नीम करौली बाबा का किरदार

हैदराबाद: इंडियन बॉक्स ऑफिस पर धाक जमाकर बैठी फिल्म ‘हनुमान अंश’ की चारों ओर चर्चा है. फिल्म की कहानी दर्शकों को पसंद आ रही है और इसका कलेक्शन भी दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है. दर्शकों को फिल्म से आध्यात्मिकता का बड़ा पाठ सीखने को मिल रहा है. अब तो फिल्म वर्ल्डवाइड भी रिलीज होने जा रही है. मेकर्स ने हनुमान अंश की वर्ल्डवाइड रिलीज का भी एलान कर दिया है. अब फिल्म बहुत जल्द ही विदेशी दर्शकों के बीच भी होगी. यह फिल्म बाबा नीम करौली के जीवन पर आधारित है, जिन्हें महाराज जी के नाम से जाना जाता है. हनुमान अंश की वर्ल्डवाइड रिलीज से पहले जानते हैं कि आखिर कौन हैं शोभिनव सत्या, जिन्होंने महाराज जी के किरदार में अपनी एक्टिंग से जान फूंक दी.

कौन हैं शोभिनव सत्या?

शोभिनव सत्या को फिल्म हनुमान अंश से बड़ी पहचान मिली है, जबकि वह टीवी के पॉपुलर शो CID के लिए भी काम कर चुके हैं. उन्होंने इस शो में पर्दे के पीछे काम किया था. शोभिनव एक एक्टर होने के साथ-साथ एक फिल्ममेकर भी हैं. वह उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं. उन्होंने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से एक्टिंग की पढ़ाई की है. वह सीआईडी के अलावा रागिनी एमएमएस रिटर्न्स, हैप्पिली एवर ऑफ्टर, महापौर जैसे टीवी और स्ट्रीमिंग प्रोजेक्ट्स में काम कर चुके हैं.

कैसे मिला हनुमान अंश में रोल?

शोभिनव सत्या के लिए इसे किस्मत का ही खेल कह सकते हैं, क्योंकि हनुमान अंश में उन्हें यह रोल अचानक ही मिला था. इसे एक चमत्कार ही माना जा सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो महाराज जी के रोल के लिए पहले जिस एक्टर को चुना गया था, वो बीमार पड़ गया था. दूसरी तरफ प्रोडक्शन का काम चालू था और एक्टर की तलाश थी. फिर फिल्म के डायरेक्टर विशाल ने अचानक सत्या का ऑडिशन लिया. सत्या का ऑडिशन तकरीबन 5 घंटे तक चला. विशाल चतुर्वेदी ने सत्या की एक्टिंग स्किल देखकर उन्हें महाराज जी का रोल देने का फैसला लिया. इसके बाद शोभिनव ने अपनी एक्टिंग से सभी का दिल जीतने का काम किया.

नीम करौली बाबा के बारे में

बाबा एक आध्यात्मिक गुरु और भगवान हनुमान के परम भक्त थे. उनका असली नाम लक्ष्मण नायारण शर्मा था. उनका जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में साल 1900 के आसपास हुआ था. उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के ‘नीम करौर’ (नीमकरली) गांव से उनका संबंध जुड़ने के बाद उन्हें ‘नीम करौली बाबा’ कहा जाने लगा. उन्होंने 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में अपना शरीर त्याग दिया था. उत्तराखंड में उनका कैंची धाम आश्रम है.