लखनऊ: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम-1969 में संशोधन के तहत विलंब शुल्क की नई दरें लागू कर दी हैं. अब अगर किसी ने 21 दिन के बाद रजिस्ट्रेशन कराया तो उसे पहले से 10 गुना तक अधिक लेट फीस देनी पड़ेगी. सरकार की यह नई व्यवस्था शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में समान रूप से लागू होगी.
राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के अनुसार घटना के 21 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन निःशुल्क है, लेकिन 21 दिन के बाद अब अगर आवेदन किया गया तो विलंब शुल्क देना अनिवार्य है.
नई दरों के मुताबिक
- 21 से 30 दिन के अंदर: 2 रुपये की जगह 20 रुपये विलंब शुल्क लगेगा
- 30 दिन से 1 साल के अंदर: 5 रुपये की जगह 50 रुपये विलंब शुल्क लगेगा
- 1 साल बाद: 10 रुपये की जगह 100 रुपये विलंब शुल्क लगेगा
पहले कितना था शुल्क ?
- 21 दिन के बाद 30 दिन के भीतर सिर्फ 2 रुपये
- 30 दिन से 1 साल तक 5 रुपये
- 1 साल बाद 10 रुपये शुल्क लगता था
नियम के मुताबिक बच्चे के जन्म के बाद स्थानीय अधिकारियों के पास 21 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन कराना होता है. अगर बच्चे का जन्म घर में हुआ है तो भी 21 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना होगा. अगर इस अवधि में पंजीकरण नहीं होता तो पुलिस सत्यापन के बाद ही प्रमाण पत्र जारी होता है.
1 साल बाद और सख्त प्रक्रिया
वहीं, अगर एक वर्ष की देरी से पंजीकरण कराने पर अब एसडीएम का आदेश जरूरी कर दिया गया है. पहले भी उप जिलाधिकारी के आदेश की जरूरत थी, लेकिन अब शुल्क भी 10 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया है.
ऑनलाइन व्यवस्था भी लागू
केंद्र सरकार के 2023 के संशोधन के बाद जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी है. अक्टूबर 2023 के बाद जन्मे बच्चों के लिए जन्म प्रमाण पत्र ही एकमात्र वैध दस्तावेज होगा. सभी बड़े अस्पतालों के पास नगर निगम की यूजर आईडी है और वे अपने स्तर से ही प्रमाणपत्र जारी कर देते हैं. बता दें कि बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र उसके स्कूल में प्रवेश, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, बीमा पॉलिसी और राशन कार्ड में नाम दर्ज कराने के लिए जरूरी होता है. वहीं, मृत्यु प्रमाण पत्र संपत्ति के उत्तराधिकार, पेंशन और बीमा दावों के निपटारे के लिए काम आता है.
इस मामले में राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि नई व्यवस्था 16 जून की अधिसूचना के तहत लागू की गई है. सरकार का मकसद पंजीकरण को समयबद्ध बनाना और डेटाबेस को राष्ट्रीय स्तर पर अपडेट करना है. इसलिए नागरिकों को सलाह है कि जन्म या मृत्यु की घटना के 21 दिन के भीतर ही नजदीकी रजिस्ट्रार कार्यालय या सीआरएस पोर्टल पर आवेदन कर दें, ताकि विलंब शुल्क से बचा जा सके.