नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की सियासत को यदि देखें तो तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपनी पकड़ मजबूत होने का दावा कर रही है लेकिन आंकड़ों की गहराई में उतरते ही तस्वीर बदल जाती है. यहां चुनाव किसी लहर से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे मार्जिन की वजह से जीते जाते रहे हैं और भाजपा ठीक इसी लक्ष्य को लेकर चल रही है.
पार्टी सूत्रों का कहना है कि भाजपा की नजर ऐसी सीटों पर है जिसमें पिछले चुनाव में टीएमसी 10 प्रतिशत से भी कम की मार्जिन से जीती थी और ऐसी लगभग 114 सीटें हैं और पार्टी ने मिशन बंगाल के तहत इन सीटों के लिए काफी गहन प्लान तैयार किया है.
2024 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 114 सीटों पर 10 प्रतिशत से अधिक अंतर से जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा के पास ऐसी सिर्फ 35 सीटें थीं. हालांकि, तृणमूल कांग्रेस कई जगहों पर बहुत बड़े अंतर से भी चुनाव जीती, जबकि भाजपा की ज्यादातर सीटों में हार का मार्जिन कम रहा था. 2024 में टीएमसी के 55.8 लाख वोट ऐसे थे जो जरूरत से ज्यादा अंतर में चले गए. भाजपा के मामले में यह आंकड़ा सिर्फ 11.9 लाख था.
2021 के विधानसभा चुनाव में भी लगभग यही स्थिति रही. टीएमसी 65 लाख, भाजपा 5.5 लाख व्यर्थ वोट. यानी एक तरफ ज्यादा से ज्यादा जीत का गणित तो दूसरी तरफ जहां जरूरत हो, वहीं न्यूनतम अंतर से जीत की सटीक रणनीति. पार्टी के नेताओं का मानना है कि पश्चिम बंगाल में 58 सीटें ऐसी हैं जहां मुकाबला बेहद नजदीकी होने की संभावना है. अगर इन सीटों पर मात्र 1.92 लाख वोटों का झुकाव बदल जाए तो चुनावी परिणाम पूरी तरह से पलट सकता है.
इसी बीच मतदाता सूची के विशेष संशोधन में करीब 91 लाख नाम हटाए गए हैं. इस मुद्दे पर दोनों पार्टियां आमने-सामने भी हैं. तृणमूल कांग्रेस इसे ‘खेल में गड़बड़ी’ बता रही है, जबकि भाजपा का कहना है कि ‘खेल अब साफ हो रहा है.’ ममता बनर्जी ने अमित शाह पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा, “आप देश के गृह मंत्री हैं… फोन पर निर्देश देते हैं कि मुसलमान दिखते ही उनके नाम काट दो. मुर्शिदाबाद में और मेरे क्षेत्र में भी वोट काटे गए. क्या आप इसी तरह चुनाव जीतेंगे.”
वहीं पूरे बंगाल में भ्रष्टाचार और असंतोष के मुद्दे भी इस बार के चुनाव में काफी हावी हैं. भाजपा ममता बनर्जी सरकार पर भ्रष्टाचार, भर्ती घोटाले, कटमनी और कानून-व्यवस्था बिगड़ने के आरोपों के साथ हमलावर है. पार्टी का दावा है कि इन मुद्दों पर जनता में गुस्सा बढ़ रहा है. तृणमूल कांग्रेस इन्हें ‘राजनीतिक धुआं’ करार दे रही है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा कि चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस से ‘हिसाब’ लिया जाएगा. वहीं अभिषेक बनर्जी ने तीखे तेवर दिखाते हुए पाकिस्तान को भी ‘घर’ में घुसकर जवाब देने’ की चेतावनी तक दे दी. यानी इस चुनाव में अपने राज्य की समस्याओं से लेकर पाकिस्तान तक की एंट्री हो चुकी है और भाजपा के लिए हमेशा से पश्चिम बंगाल का चुनाव नाक की लड़ाई होती है.
यही वजह है कि गृह मंत्री अमित शाह खुद इस राज्य की चुनाव की कमान हमेशा से अपने हाथ में रखते हैं और इस बार भी नजारा कुछ ऐसा ही है. हाल में ही शाह ने एक कार्यक्रम में ऐलान किया कि अब वो 15 दिन लगातार पश्चिम बंगाल में ही रहने वाले हैं. कुल मिलाकर देखा जाए तो तृणमूल कांग्रेस अपनी बाकी सीटों पर फोकस कर रही हैं जहां उसकी जीत का अंतर काफी बड़ा रहा था. जबकि इससे उलट भाजपा छोटी-छोटी सीटों पर भी सटीक रणनीति के साथ आगे बढ़ रही है.
इस बार बंगाल का चुनाव ये भी साबित करेगा कि जीत का फैसला न तो शोर से होगा और न ही भारी भरकम दावों से, यहीं नहीं वोटों के बहुत ज्यादा प्रतिशत को लेकर भी पार्टियां ज्यादा भरोसा नहीं कर रहीं बल्कि उससे उलट सुई की नोंक जितनी छोटे मार्जिन और सटीक जोड़-घटाव और ऐसी सीटों पर भी भाजपा कड़ी से कड़ी मेहनत करते हुए नजर बनाए हुए है. यही वजह है कि बंगाल में इस बार भाषणों से ज्यादा हिसाब-किताब का खेल चल रहा है.