लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए. उन्होंने साफ कहा कि स्टंटबाजी, ओवरस्पीडिंग और अवैध वाहनों पर परमानेंट ब्रेक लगाएं. साथ ही सीएम योगी ने कहा कि हादसों को रोकने के लिए टॉप टू बॉटम’ अफसरों की जवाबदेही तय होगी. बुधवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में परिवहन विभाग की बैठक हुई. जिसमें सड़क सुरक्षा के संबंध में गंभीर चर्चा की गई. योगी आदित्यनाथ ने हाल दिनों में लखीमपुर खीरी, अमरोहा, आगरा, अलीगढ़ आदि जनपदों में हुई मार्ग दुर्घटनाओं पर दुख भी जताया है.
बता दें कि, उत्तर प्रदेश देश में सड़क दुर्घटनाओं के मामले में दूसरे नंबर पर तो मौतों के मामलों में पहले नंबर पर है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लगातार सख्ती के बाद अब परिवहन विभाग ने दुर्घटनाओं और मौतों का आंकड़ा कुछ कम कर पाने में कामयाबी पाई है. जनवरी से अप्रैल तक दुर्घटनाओं में 21 प्रतिशत और मृतकों की संख्या में 22 प्रतिशत की कमी आई है.
बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारे लिए प्रत्येक व्यक्ति का जीवन महत्वपूर्ण है. सड़क दुर्घटनाओं में हो रहीं मौतें देश और राज्य की क्षति है. यह अधिकांश दुर्घटनाएं जागरूकता के अभाव में होती है, ऐसे में सभी जिलों में सड़क सुरक्षा से संबंधित विशेष अभियान चलाए जाएं. सड़क दुर्घटनाओं के संबंध में टॉप टू बॉटम हर अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए. शासन स्तर पर सड़क सुरक्षा के संबंध में पाक्षिक बैठक कर कार्यों की प्रगति का मूल्यांकन किया जाए. उन जिलों और स्थानों की पहचान करें, जहां अधिक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं. वहां के कारणों का पता लगाते हुए समस्याओं के समाधान की कार्ययोजना भी बनाई जाए.
मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर निर्देश दिया कि सड़कों पर स्टंटबाजी, ओवर स्पीड, नशे में वाहन संचालन किसी भी दशा में स्वीकार नहीं है. ऐसा करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए. जिला प्रशासन, परिवहन, पुलिस समेत संबंधित विभाग सड़क सुरक्षा को लेकर नियमित बैठक करें. किसी भी दशा में अवैध वाहनों का परिचालन नहीं हो सके. सड़कों से अवैध स्टैंड तत्काल हटाए जाएं. सड़क के किनारे कहीं भी वाहनों की पार्किंग न हो. उपयुक्त स्थल पर ही पार्किंग सुनिश्चित की जाए.
शासन स्तर पर तैनात परिवहन विभाग या निगम के अधिकारी भी फील्ड में उतरें. जिलों में तैनात आरटीओ-एआरटीओ की जवाबदेही तय की जाए. परिवहन निगम सुनिश्चित करे कि सही फिटनेस वाली बसें ही सड़कों पर चलें और उनकी बसें अपने स्टैंड की पार्किंग में ही खड़ी हों. चालकों-परिचालकों का नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण होता रहे.
मुख्यमंत्री ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर कहा कि स्कूल मैनेजमेंट वाहनों का फिटनेस अनिवार्य रूप से करा लें. बिना फिटनेस के कोई भी वाहन सड़क पर न चले. अगर किसी वाहन का बार-बार चालान हो रहा है तो उस पर कठोरतम कार्रवाई करें. मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क सुरक्षा के संबंध में जनजागरूकता पर विशेष ध्यान दिया जाए. चौराहों, टोल प्लाजा, महत्वपूर्ण स्थलों, व्यस्त मार्गों, उपयुक्त स्थानों पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम के माध्यम से यातायात नियमों के संबंध में आमजन को जानकारी दी जाए.
सीट बेल्ट, हेलमेट और सड़क सुरक्षा के अन्य मानकों को अपनाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाकर लोगों को प्रेरित किया जाए. जनपदों में वेंडिंग जोन विकसित करें और स्ट्रीट वेंडर्स को सुरक्षित माहौल प्रदान करें. हाईवे, एक्सप्रेसवे व व्यस्त मार्गों पर नियमित पेट्रोलिंग हो और इन पर एंबुलेंस की भी समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. समीप के अस्पतालों में इलाज की व्यापक व्यवस्था हो, जिससे दुर्घटना में घायल को समय से उपचार मिल सके.
सीएम योगी ने मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना को बेहतर ढंग से क्रियान्वित करने की बात कही. इससे आमजन को सार्वजनिक परिवहन के जरिए आवागमन में काफी सहूलियत मिलेगी.
लोकनिर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रदेश की सड़कों के ब्लैक स्पॉट चिह्नित कर उनके निराकरण की दिशा में तय समय में कार्य करें. उपयुक्त स्थलों पर साइनेज लगाए जाएं. चौराहों समेत आवश्यक स्थानों पर टेबलटॉप स्पीड ब्रेकर बनाए जाएं. निर्देश दिया कि टोल प्लाजा के आसपास साफ-सफाई सुनिश्चित हो, बेतरतीब वाहन न खड़े हों.
यातायात पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि सड़क सुरक्षा कोष से मिले अनुदान का इस्तेमाल करते हुए 25 चार पहिया इंटरसेप्टर, 62 दोपहिया इंटरसेप्टर और 82 स्पीड लेजर गन जिलों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं. यूपी एकमात्र राज्य है जहां सभी 75 जिलों के 487 क्रिटिकल पुलिस थानों पर जीरो फैटिलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना लागू की गई है. इन क्रिटिकल थानों में 573 क्रिटिकल कॉरिडोर टीम गठित की गई हैं. बीते चार महीने में इस योजना के क्रियान्वयन से 566 व्यक्ति की जान बचाई गई है.