वाराणसी: BHU और वाराणसी स्मार्ट सिटी ने स्वच्छता और परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम बढ़ाया है. अब यूनिवर्सिटी कैंपस में मोबाइल ऐप से साइकिल और बैटरी वाली ई-बाइक किराए पर मिलेगी. इससे स्टूडेंट्स और टीचर्स को आने-जाने में आसानी होगी और प्रदूषण भी कम होगा.
बता दें, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय और वाराणसी स्मार्ट सिटी ने विश्वविद्यालय परिसर में ऐप-आधारित सार्वजनिक साइकिल एवं ई-बाइक शेयरिंग नेटवर्क स्थापित करने के लिए साझेदारी की है. इस सेवा का संचालन शुरू होने पर उपयोगकर्ता मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से GPS-एनेबल्ड साइकिलों और उच्च क्षमता वाली ई-बाइक का उपयोग कर सकेंगे.
एप्लिकेशन उपयोग करने वाले को पेमेंट ऑप्शन मिलेगा, जिसके जरिए यूजेज चार्ज का सुविधाजनक भुगतान कर इन साइकिल और ई-बाइक को इस्तेमाल किया जा सकेगा. ये प्रणाली विश्वविद्यालय परिसर में आसानी से आवागमन सुनिश्चित करने के साथ-साथ उपयोगकर्ताओं को शहर के व्यापक परिवहन नेटवर्क से भी जोड़ेगी. ये सुविधा अगस्त माह के अंत तक शुरू हो सकती है.
परियोजना के तहत बीएचयू परिसर के विभिन्न रणनीतिक और अधिक आवागमन वाले स्थानों पर डॉकिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं. प्रारम्भिक चरण में ई-बाइक और पारंपरिक पैडल साइकिलों की व्यवस्था की जाएगी. जिससे उपयोगकर्ताओं को सुलभ और पर्यावरण-अनुकूल आवागमन के विकल्प उपलब्ध होंगे.
सुरक्षा और कुशल संचालन सुनिश्चित करने के लिए सभी वाहनों को लाइव GPS ट्रैकिंग प्रणाली से लैस किया जाएगा. जिसे शहर के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ा जाएगा.
यह पहल परिवहन को प्रोत्साहित करने, मोटर चालित वाहनों पर निर्भरता कम करने और विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों और आने वाले मेहमानों के बीच स्वस्थ आवागमन की संस्कृति को बढ़ावा देने में सहायक साबित होगी.
कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय अपनी शैक्षणिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ सामाजिक विकास और सामुदायिक कल्याण के प्रति भी समान रूप से प्रतिबद्ध है. वाराणसी स्मार्ट सिटी के साथ यह साझेदारी समाज में पॉजिटिव बदलाव लाने के हमारे सतत प्रयासों का एक महत्त्वपूर्ण विस्तार है. इस पहल को लागू करने के लिए वाराणसी स्मार्ट सिटी के साथ सहयोग कर हमें अत्यंत प्रसन्नता है. इससे न केवल परिसर में आवागमन और अधिक सुगम और सुविधाजनक होगा, बल्कि पर्यावरण-अनुकूल परिवहन संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा.