पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर की बातचीत, द्विपक्षीय सहयोग और होर्मुज की नाकाबंदी पर हुई चर्चा

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को फोन पर बातचीत की. दोनों नेताओं के बीच लगभग 40 मिनट तक बातचीत हुई. ट्रंप से बातचीत के तुरंत बाद, पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने और ट्रंप ने द्विपक्षीय संबंधों में हुई “काफी प्रगति” की समीक्षा की और दोनों पक्ष “सभी क्षेत्रों” में भारत-अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

मोदी ने एक्स पोस्ट में कहा, “मेरे दोस्त राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फोन आया. हमने विभिन्न क्षेत्रों में अपने द्विपक्षीय सहयोग में हुई काफी प्रगति की समीक्षा की. हम सभी क्षेत्रों में अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हमने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा की और होर्मुज स्ट्रेट को खुला और सुरक्षित रखने के महत्व पर जोर दिया.”

दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब अमेरिका द्वारा ईरान के बंदरगाहों की नौसैनिक घेराबंदी को लेकर दुनिया भर में चिंताएं बढ़ गई हैं. साथ ही ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि इस्लामाबाद में शुरुआती बातचीत नाकाम होने के कुछ दिनों बाद, अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत का दूसरा दौर हो सकता है.

इस साल मोदी और ट्रंप के बीच यह तीसरी फोन कॉल थी और ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई शांति वार्ता के बाद यह पहली कॉल थी. दोनों नेताओं ने 2 फरवरी को एक व्यापार समझौते में हुई प्रगति की घोषणा करने के लिए और 24 मार्च को पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा करने के लिए बात की थी.

मोदी और ट्रंप के बीच बातचीत के बाद, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने पत्रकारों को बताया कि भारत और अमेरिका के बीच अगले “कुछ दिनों और हफ्तों” में ऊर्जा क्षेत्र सहित कुछ “बड़ी डील” होने की उम्मीद है. हालांकि, उन्होंने इन डील के बारे में विस्तार से बताने से इनकार कर दिया.

गोर के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच फोन पर 40 मिनट की बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया में होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी का मुद्दा भी उठा. अमेरिकी राजदूत गोर के अनुसार, बातचीत ट्रंप के इन शब्दों के साथ खत्म हुई, “मैं बस आपको यह बताना चाहता हूं कि हम सभी आपसे बहुत प्यार करते हैं.”

उन्होंने कहा, “हमारे पास कुछ बड़े सौदे हैं जिनकी घोषणा अगले कुछ दिनों या हफ्तों में की जाएगी, और हमारे संबंध बहुत मजबूत स्थिति में हैं. हमारे पास कुछ बहुत ही दिलचस्प और रोमांचक चीजें होंगी.”

सूत्रों ने बताया कि ऊर्जा क्षेत्र में भारत की कुछ सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां आने वाले दिनों में अमेरिकी कंपनियों के साथ सहयोग की घोषणा कर सकती हैं. पश्चिम एशिया पर मोदी-ट्रंप की बातचीत के बारे में गोर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति इस इलाके की पूरी स्थिति के बारे में प्रधानमंत्री को जानकारी देना चाहते थे. उन्होंने कहा, “एक ऐसा देश है जिसने पूरी दुनिया को बंधक बना रखा है. ये अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है. यहां अंतरराष्ट्रीय समझौते हैं.”

गोर का इशारा ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही रोकने की ओर था, जिसके कारण ऊर्जा की कीमतें बढ़ गई हैं. उन्होंने कहा, “कीमतें (तेल और गैस की) बढ़ने की सिर्फ एक ही वजह है (और वह यह है) कि कोई इस इलाके को बंधक बनाए हुए है. इसलिए, अमेरिका इस जलमार्ग को खोलना चाहता है और मुझे लगता है कि इससे पूरी दुनिया को फायदा होगा, जिसमें भारत भी शामिल है.”

गोर ने कहा कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी पर भी चर्चा की. उन्होंने इस्लामाबाद में बातचीत नाकाम होने के बाद ईरान और अमेरिका के बीच किसी भी नई बातचीत के बारे में सवालों के जवाब देने से मना कर दिया. उन्होंने कहा, “भविष्य की किसी भी बातचीत का ऐलान करना मेरा काम नहीं है. उन्होंने नाकेबंदी और इसे जल्द से जल्द फिर से खोलने के महत्व पर बात की. सच कहूं तो, यह पूरा इलाका, पूरी दुनिया इसकी वजह से परेशान है.”

उन्होंने आगे कहा, “किसी एक देश को दुनिया में कहीं और की बत्तियां बुझाने का अधिकार क्यों होना चाहिए? यह गलत है. इसे रुकना चाहिए, और अमेरिका इसे रोकने के लिए पुख्ता इरादा रखता है.”