लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने रविवार को भाजपा कार्यालय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पार्टी और समाजवादी पार्टी पर जोरदार हमला बोला.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की वजह से ही महिलाओं को उनका अधिकार नहीं मिल पाया है. यह दोनों ही पार्टियां नहीं चाहती हैं कि समाज की महिलाएं आगे बढ़ें.
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा से ही महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए, उन्हें सशक्त करने के लिए प्रयास कर रही है.
इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने शाह बानों केस से कांग्रेस पर हमला किया तो स्टेट गेस्ट हाउस कांड को लेकर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा.
उन्होंने कहा कि सपाइयों के लिए तो एक बात बहुत फेमस है, देख सपाई बिटिया घबराई. उन्होंने कहा कांग्रेस, सपा समेत इंडी गठबंधन के सभी दलों को आधी आबादी से माफी मांगनी चाहिए.
मुख्यमंत्री की प्रेस कार्फ्रेंस के दौरान मंच पर केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद, राष्ट्रीय लोक दल की तरफ से योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार और अपना दल (सोनेलाल) की तरफ से विधायक रामकुमार भी मंच पर उपस्थित रहे.
इस मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब 2014 में देश की सत्ता अपने हाथों में ली थी, तब उन्होंने देश के अंदर एक बात बहुत स्पष्ट की थी.
उन्होंने कहा था देश के अंदर चार ही जातियां हैं. एक नारी है. एक गरीब है. एक युवा है और एक किसान है. भारत को कमजोर करने की नीयत से जिन लोगों ने जातिवाद के नाम पर, अपने स्वयं के परिवार का भरण पोषण करके उनके लिए देश को लूटा है. स्वाभाविक रूप से उनके लिए यह चुनौती है और चेतावनी भी, इसीलिए उन्होंने हमेशा किसी भी ऐसे प्रोग्रेसिव कदम का जो प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जब भी उठा है, कांग्रेस और उसके जितने भी पार्टनर हैं उन सबने हमेशा उस प्रोग्रेसिव सोच को और देश के हित में उठाए जाने वाले कदम का विरोध किया है.
नारी शक्ति वंदन की दृष्टि से क्या कुछ हुआ और पब्लिक रिएक्शन क्या है इसके बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि हम कह सकते हैं कि आधी आबादी के मन में विपक्ष के इस नारी विरोधी आचरण के बारे में भारी आक्रोश है.
कांग्रेस और इंडी गठबंधन समाजवादी पार्टी, आरजेडी, टीएमसी, डीएमके और अन्य दलों का जो इस पाप में भागीदार थे उनके प्रति आधी आबादी के मन में आक्रोश देखने को मिला है. कैसे एक ओर प्रधानमंत्री की तरफ से उठाए जाने वाले एक-एक समाज के, देश के हित में कदम उठाए गए हैं, उन कदमों में कैसे बैरियर के रूप में और उन कदमों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए इंडी गठबंधन के साथ षड्यंत्र करता है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हुआ था, लेकिन जब महिला संगठनों, सामाजिक संगठनों ने इस बात की मांग की कि अधिनियम 2034 के बजाय 2029 में लागू हो तो उनकी मंशा के अनुरूप सभी पक्षों में विचार विमर्श करने के बाद नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन लेकर आए. इसके लिए संसद का 16, 17 और 18 अप्रैल को विशेष अधिवेशन भी हुआ. कुछ राज्यों ने इस बारे में मांग उठाई थी कि ऐसा न हो कि इसके माध्यम से उनके हक को कम कर दिया जाए.
प्रधानमंत्री ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम विधेयक 2023 में पारित करते समय तय किया था कि किसी का हक नहीं छीना जाएगा. 33 फ़ीसदी आरक्षण जो हम अपनी माता बहनों को उपलब्ध करवा रहे हैं , इसके लिए इतनी अतिरिक्त सीट लोकसभा में और विधानसभा में बढ़ाएंगे.
जब इधर यह बात चर्चा में आई कि दक्षिण भारत के राज्य कह रहे हैं कि हमारा हक कम होगा. प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया कि 2011 की जनगणना के अनुसार जो व्यवस्था है उसी के तहत जैसे उत्तर के राज्यों में, पूर्व के राज्यों में बढ़ेंगी, वैसे ही उसी अनुपात में दक्षिण के राज्यों में भी सीटें बढ़ेंगी.
हक किसी का कम नहीं होगा. केवल एक ही इच्छा है कि सारा सदन मिलकर भारत की नारी को सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के प्रत्येक नारी शक्ति वंदन अधिनियम को इस संशोधन के साथ पारित करके 2029 में उनका अधिकार उन्हें दे दे, लेकिन जो दृश्य वास्तव में सदन के अंदर इंडी गठबंधन का रहा है, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी डीएमके का, यह पूरी तरीके से एक बार उस दृश्य की ओर ध्यान आकर्षित करता है जो भरी सभा में द्रोपदी का चीर हरण जैसा दृश्य था. किस प्रकार की टिप्पणी और गैर जिम्मेदाराना टिप्पणियां विपक्ष की तरफ से की गईं. किस प्रकार का आचरण किया गया, यह किसी से छुपा नहीं है, इसीलिए मैं कहना चाहता हूं कि सब आश्वासन के बावजूद सर्व सम्मति से अगर यह कार्य होता तो स्वाभाविक रूप से पूरे सदन को इसका श्रेय मिलता है
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने उसमें मुद्दा छेड़ा कि इसमें मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण क्यों नहीं दिया जा रहा है? यह संविधान की दुहाई देते हैं, लेकिन डॉ भीमराव आंबेडकर की भावना के प्रति इनका क्या रुख है यहां देखने को मिला है. जब भारत का संविधान निर्माण हो रहा था तो उस समय भी धर्म के आधार पर आरक्षण देने की मांग उठी थी.
सर्वसम्मति से इसका वहां पर सभी पक्षों ने विरोध किया. डॉ भीमराव आंबेडकर ने इस पर बहुत तीखी टिप्पणी की थी. एक बार विभाजन हो गया है भारत दूसरे विभाजन के लिए तैयार नहीं हो सकता.
सरदार वल्लभ भाई पटेल ने विरोध किया. उस समय के संविधान निर्माण समिति से जुड़े हुए सभी सदस्यों ने इसका पुरजोर विरोध किया, लेकिन समाजवादी पार्टी और उनके अन्य सहयोगी दल कांग्रेस की उस रणनीति में फंसे हुए हैं.
कांग्रेस पार्टी और समाजवादी पार्टी से पूछना चाहता हूं कि महिला आरक्षण से जुड़ा हुआ मुद्दा जो नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से पारित हुआ था इसमें पुरुष का हक नहीं मारा जा रहा था, लेकिन महिला सशक्तिकरण के लिए एक बहुत ही प्रोग्रेसिव सोच के साथ कदम उठाया गया.
कांग्रेस पर शाहबानो केस को लेकर हमला
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जब मुस्लिम महिलाओं की बात करते हैं वे तब कहां थे जब शाहबानो प्रकरण में कांग्रेस की सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को पूरी तरह वंचित करने का प्रयास किया था. यह इंडी गठबंधन है. जब प्रधानमंत्री मोदी ने शाहबानो प्रकरण में कांग्रेस के इस पाप का परिमार्जन करने का कार्य किया था और उस समय प्रधानमंत्री ने देश के अंदर ट्रिपल तलाक पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया.
भारत का कानून शादी विवाह के लिए प्रत्येक नागरिक पर समान रूप से लागू होगा, तब ट्रिपल तलाक के खिलाफ बनाए गए कानून का भी कांग्रेस और इंडी गठबंधन के जितने भी सहयोगी दल है उन्होंने विरोध किया था.यह उनके दोहरे आचरण को प्रदर्शित करता है. ऐसा नहीं है कि इन लोगों को देश के अंदर सत्ता में रहने का अधिकार न प्राप्त हुआ. आज जो लोग महिलाओं के हक की बात करते हैं उनसे पूछा जाना चाहिए कांग्रेस और इंडी गठबंधन से कि सबसे अधिक समय तक शासन करने का उन्हें ही अधिकार प्राप्त हुआ है, लेकिन जिन चार जातियों का उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया नारी के लिए भारत की आधी आबादी के लिए, गरीब के लिए, अन्नदाता किसान के लिए और युवा के लिए, कोई भी अच्छी सोच, अच्छे प्रोग्राम, प्रोग्रेसिव सोच को कभी भी इंडी गठबंधन आगे नहीं बढ़ा पाया.
प्रधानमंत्री मोदी ने जब देश के अंदर 2014 में सत्ता संभाली इसके बाद उन्होंने प्रत्येक तबके के लिए बिना किसी भेदभाव के क्षेत्र और भाषा मुद्दा नहीं था, सबका साथ सबका विकास, सबका प्रयास और सबका विश्वास इन सबको लेकर एक साथ चलने की बात थी. सर्वे भवंतु सुखिन: सर्वे संतु निरामया, इस भाव के साथ उन्होंने अपने कदम आगे बढ़ाए.
नारी शक्ति के लिए किए जाने वाले प्रयास में याद करिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का पहला प्रस्ताव पारित किया. बेटी की शिक्षा होगी. भ्रूण हत्या नहीं होगी. मात्र वंदन योजना के तहत गर्भ को सुरक्षित करने के लिए कदम उठाया. मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में बेहतरीन प्रणाम सामने आए हैं. ये कदम प्रधानमंत्री की तरफ से उठाए गए उन कदमों का हिस्सा है. बेटी को शिक्षा में अधिकार मिलना चाहिए.
जब डबल इंजन की सरकार उत्तर प्रदेश में आई हम लोगों ने मुख्यमंत्री कन्या समृद्धि योजना चलाई. बेटी पैदा होने के साथ ही एक निश्चित धनराशि उनके अकाउंट में जाती है. बेटी एक वर्ष की होगी सभी प्रकार के टीकाओं से आच्छादित है तो एक निश्चित राशि उसके अकाउंट में जाती है. बेटी पहली क्लास और 5 वर्ष की होगी रजिस्ट्रेशन के साथ ही एक निश्चित धनरराशि उसके अकाउंट में जाती है. बेटी पांचवी पास करके छठी में जाएगी इसके साथ ही एक निश्चित धनराशि उसके अकाउंट में जाती है.
बेटी आठवीं पास करेगी रजिस्ट्रेशन के साथ ही एक निश्चित धनराशि उसके अकाउंट में जाती है. हाई स्कूल और इंटर तक 25000 का पैकेज डबल इंजन सरकार उपलब्ध करा रही है. 26 लाख बेटियां वर्तमान में इस योजना से लाभान्वित हो रही हैं. 2017 से पहले इस प्रकार की कोई स्कीम प्रदेश के अंदर नहीं थी. मातृ वंदना योजना जो प्रधानमंत्री मातृ सुरक्षा करने के लिए शुरू की थी, इस स्कीम के अंतर्गत हर साल 500 से 600 करोड़ रुपए उन माताओं को उपलब्ध करा रहे हैं जो सुरक्षित गर्भ के लिए और आने वाले पीढ़ी सुरक्षित और स्वस्थ हो, ये अभियान भी यूपी के अंदर चल रहा है.
महिला सशक्तिकरण के लिए अगर किसी परिवार के पास आवास नहीं है तो सबसे ज्यादा पीड़ित होगी उस परिवार की महिला. किसी परिवार के पास शौचालय नहीं है सबसे ज्यादा पीड़ित होगी उस परिवार की महिला. जिस परिवार के पास उज्ज्वला योजना का कनेक्शन नहीं था. बरसात में या अन्य सीजन में उस परिवार को भोजन बनाने के लिए केरोसिन उपलब्ध नहीं हो पाता था, न ईंधन उपलब्ध हो पता था. उन्हें बहुत परेशानी होती थी. लकड़ी और कोयले से खाना बनाना होता था. आंखों में आंसू होते थे. फेफड़ों में धुआं भरता था. बीमार हो जाती थीं. इसी को ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्ज्वला योजना लागू की थी.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि चार करोड़ लोगों के लिए आवास बना और हमने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत महिलाओं को सुरक्षित रहने के लिए घर दिए हैं. अब तक 65 लाख गरीब परिवारों को इस सुविधा का लाभ प्राप्त हो चुका है. देश के अंदर 11 करोड़ परिवार लाभान्वित हुए. उत्तर प्रदेश के अंदर एक करोड़ 90 लाख परिवार इस योजना से लाभान्वित हुए हैं. फेफड़ों की बीमारी से मुक्ति, किसी भी सीजन में एलपीजी की समस्या नहीं होगी इसकी भी गारंटी मोदी की गारंटी के तहत चल रही है.
देश के अंदर 50 करोड़ तो उत्तर प्रदेश के अंदर 10 करोड लोग आयुष्मान योजना का लाभ ले रहे हैं. उत्तर प्रदेश आयुष्मान भारत में ₹500000 की स्वास्थ्य बीमा कवर दे रहा है. परिवार बीमार होता था, प्रताड़ित महिला होती थी. वह बेचारी जैसे तैसे कर्जा लेकर या अपना जेवर गिरवी रखकर पहले की सरकारों में इस तरह से उपचार कराती थी.
आज आयुष्मान योजना के तहत उन्हें मुफ्त 5 लाख तक का इलाज मिल रहा है. बेसिक शिक्षा के तहत एक करोड़ 90 लाख बच्चों को बैग, बुक, शूज और स्वेटर उपलब्ध कराने का काम डबल इंजन की सरकार कर रही है. बेटी शादी योग्य हो गई है.
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में बेटी की शादी के लिए ₹100000 दिए जा रहे हैं. अब तक हम छह लाख से अधिक बेटियों की शादी इसके अंतर्गत कर चुके हैं. निराश्रित महिला पेंशन, वृद्ध जनों के लिए, दिव्यांग जनों के लिए मिलने वाली पेंशन. किसी परिवार में दुर्भाग्य से कोई महिला निराश्रित हो जाती है, कोई महिला बुजुर्ग हो जाती है, कोई पुरसाहाल लेने वाला नहीं होता है.
डबल इंजन की सरकार एक करोड़ छह लाख से अधिक निराश्रित महिलाओं, वृद्ध जनों और दिव्यांगजनों को ₹12000 सालाना पेंशन की सुविधा का लाभ उपलब्ध करवा रही है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्ष के अंदर हमने नौ लाख से अधिक सरकारी नौकरियां उपलब्ध कराई हैं जिनमें से लगभग पौने दो लाख केवल बेटियां भर्ती हुई हैं. यूपी पुलिस में 1947 से लेकर 2017 तक महिला कार्मिकों की संख्या मात्र 10000 थी. मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि यूपी पुलिस में महिला कार्मिकों की संख्या 44000 से अधिक है.
यह संख्या बताती है कि महिला सुरक्षा, महिला सम्मान और महिला स्वावलंबन के लिए उठाए गए कदम हैं. लखपति दीदी के माध्यम से आर्थिक स्वावलंबन का लाभ महिलाएं ले रही हैं. आधे से अधिक स्टार्टअप हमारे यहां महिलाओं की तरफ से संचालित हैं. अब कौन ऐसा सेक्टर है जिसमें महिलाओं को नेतृत्व न मिला हो. शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, डिफेंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र हों, हर सेक्टर में आज अच्छी खासी संख्या महिलाओं की है. नारियों के विकास में बैरियर बना इंडी गठबंधन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत के अंदर आजादी के बाद पहली बार हुआ है कि पहले आम चुनाव से लेकर अब तक भारत की संसद में महिला जनप्रतिनिधियों की संख्या सबसे अधिक है. यह संख्या वर्तमान में लगभग 15% है. 78 महिला एमपी वर्तमान में देश की संसद में हैं, लेकिन इस संख्या को 33 और 50% तक पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अभिनव पहल थी. उस पर बैरियर बना है इंडी गठबंधन. कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आरजेडी, टीएमसी और डीएमके.
इन दलों के पास अपने पाप के परिमार्जन का एक अवसर था. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी का जब नाम लेते हैं तो यहां पर पहले से ही चर्चा होती है देख सपाई, बिटिया घबराई. स्टेट गेस्ट हाउस कांड का इनके पास अपने उस पाप को धोने का एक अवसर था. इनको इस अधिनियम को पारित करने में अपना योगदान देना चाहिए था, लेकिन दुर्भाग्य है कि लोग बैरियर बने रहे. बैरियर बनकर बस होने नहीं देना है, यानी सब कुछ इनको और उनके परिवार को मिले, किसी नारी को न मिले. किसी गरीब को न मिले, किसी युवा को न मिले और किसी किसान को न मिले. इनकी यही युक्ति है. इनका हमेशा से यही प्रयास चल रहा है, इसीलिए यह लोग संसद की कार्रवाई में हमेशा बाधक बनते हैं.