लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लोक भवन में नव चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्त पत्र वितरित किए. उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की तरफ से खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग के लिए नव चयनित 357 कनिष्ठ विश्लेषकों (औषधि) और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के नव चयनित 252 दंत स्वास्थ्य विज्ञानियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए. इस मौके पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु, राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह समेत विभाग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. इस मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया के लिए अधीनस्थ चयन सेवा आयोग के अध्यक्ष को धन्यवाद देता हूं.
उन्होंने कहा कि स्वाभाविक रूप से मां-बाप की इच्छा होती है कि उसका बच्चा पढ़ लिखकर एक सुरक्षित भविष्य की दिशा में अग्रसर हो सके. इसके लिए उन्हें अपने स्तर पर अच्छे शिक्षा दिलाने का प्रयास करता है. सही मार्ग दिखाने का प्रयास करता है, लेकिन जब अपेक्षित परिणाम नहीं आते हैं तो न केवल वह नौजवान, बल्कि उसके मां-बाप, रिश्तेदार इन सबके सपने भी चकनाचूर होते हैं. किसी नौजवान के सपने का चकनाचूर होना एक केवल एक उस युवा के साथ धोखा नहीं है बल्कि आने वाले पीढ़ी के भविष्य के साथ भी धोखा होता है और विकास को बाधित करता है.
कहा कि उत्तर प्रदेश जैसा राज्य वैसे ही बीमार नहीं हुआ था. इस प्रकार के चयन की प्रक्रिया में भेदभाव करके, बेईमानी और भ्रष्टाचार में इस राज्य को बीमारू बना दिया था. अराजक प्रदेश बना दिया था. गुंडागर्दी से त्रस्त प्रदेश बना दिया था. महीनों कर्फ्यू वाले प्रदेश के रूप में उत्तर प्रदेश को बदल दिया था. कोई भी व्यक्ति अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं करता था. चयन की प्रक्रिया में इतने भेदभाव होते थे कि न्यायालय को रोकना पड़ता था. न्यायालय ने हर एक नियुक्ति की प्रक्रिया में 2017 के पहले कहीं न कहीं उन्हें स्थगन आदेश देकर रोका हुआ था और तमाम प्रकार की तीखी टिप्पणियां भी की थीं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो बात यहां पर अभी डिप्टी सीएम बृजेश पाठक कह रहे थे कि परीक्षा कोई और देता था नियुक्ति पत्र कोई और प्राप्त करता था. यह 2017 के पहले था.
मुख्यमंत्री ने एक वाकया याद करते हुए कहा-मुझे याद है मैं गोरखपुर में सांसद था. मैं एक बार कहीं जा रहा था. आगे हाईवे जाम था. मैंने पूछा क्यों जाम है तो मुझे पुलिस के अधिकारी ने बताया कि एक नौजवान ने सुसाइड कर लिया है, क्योंकि वह गांव जहां सुसाइड हुआ था वह मेरे संसदीय क्षेत्र का हिस्सा था. मैं अपनी गाड़ी से उतरा. मैंने कहा कि मैं मिलता हूं उन परिवार के लोगों से. अधिकारियों ने मुझसे कहा लोगों में बड़ा आक्रोश है, आप मत जाइए. मैंने कहा आक्रोश आज है तो मुझे तो आने वाले समय में वोट मांगने जाना ही है. तब भी यह आक्रोश होगा. मैंने कहा कि मैं जाऊंगा. मुझे लोगों ने देखा, शांत हुए. मैंने उनसे बातचीत की. मैं आश्चर्यचकित था ये देखकर कि जिस परिवार के नौजवान ने आत्महत्या की थी वह अकेला उस परिवार का लड़का था. मैंने उनसे पूछा यह घटना कैसे घटित हुई.
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती में मेरिट में इसका नाम आया था, लेकिन इसको नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया. उसके बाद वह डिप्रेशन में आया और उसने सुसाइड कर लिया. उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा चयन आयोग की भर्ती की प्रक्रिया के बारे में उस समय का हर युवा जानता है. आप लोग उस समय नाबालिग रहे होंगे. जो व्यक्ति एलिजिबल नहीं था वह चेयरमैन बन जाता था. जिसकी स्वयं की डिग्री फर्जी थी वह आयोग का चेयरमैन बनकर सिलेक्शन करता था. इस प्रकार की अराजकता होती थी. पैसे का लेनदेन होता था. भर्ती नहीं हो पाती थी. हम लोगों ने देखा है.
सीएम योगी ने कहा कि 2017 में जब मैं मुख्यमंत्री बना तो मैंने पूछा भर्ती क्यों नहीं हो रही? हर एक भर्ती में स्टे था. मैंने कहा स्ट का कोई कारण तो होगा? मैंने सबसे पहले उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती बोर्ड को बुलाया क्योंकि सबसे ज्यादा भर्ती उसमें ही होनी थी. मैंने पूछा स्टे क्यों है? उन्होंने बताया कि कोर्ट चाहता है कि भर्ती के प्रक्रिया पारदर्शी हो. मैंने कहा आप लोग क्या चाहते हैं कि पारदर्शी क्यों नहीं होनी चाहिए? न्यायालय जो चाहता है उसके अनुसार नियमावली तैयार कराइए और भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाइए. न्यायालय में शपथ पत्र दाखिल करो. अगले तीन माह के अंदर सभी औपचारिकताएं पूरी की गईं. सुप्रीम कोर्ट ने हमें परमिशन दी. हमने भर्ती की प्रक्रिया प्रारंभ की. मुझे बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि अब तक हम दो लाख 20 हजार पुलिस कर्मियों की भर्ती यूपी में कर चुके हैं. सिर्फ पुलिस में ही 2,20,000 की भर्ती हुई है. पहले छोटी सोच थी. काम भी छोटे-छोटे करते थे.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि साल 2025 में 60000 नौजवानों की भर्ती करनी थी. सभी लोग कहते थे 60000 कैसे हो पाएगी? कुछ पुराने पुलिस अधिकारी थे जो उसी आदत से ग्रस्त थे, लेकिन मैंने कहा मैं सब कुछ करवा लूंगा. ट्रेनिंग की भी व्यवस्था हो जाएगी. मैंने उनसे पूछा उत्तर प्रदेश में ट्रेनिंग की क्या स्थिति है. बताया गया कि कुल क्षमता सिर्फ 3000 है. मैंने भारत सरकार से बातचीत की. मैंने कहा मिलिट्री, पैरामिलिट्री के ट्रेनिंग सेंटर होंगे अन्य राज्यों से बात की और तब जाकर हम लोग पुलिस की वह भर्ती पूरी कर पाए थे. 2025 में हमने भर्ती की. 60,244 नौजवानों का एक साथ सिलेक्शन हुआ और सभी की ट्रेनिंग भी हमने कराई. सीएम ने कहा कि गवर्नमेंट की स्पष्ट नीति होनी चाहिए. नीयत साफ होनी चाहिए तो परिणाम आते ही हैं. आज इस दिशा में किया गया प्रयास का परिणाम है कि हमने अब तक नौ लाख से अधिक नौजवानों को सरकारी नौकरी दी है.
उत्तर प्रदेश के अंदर और देश के अंदर किसी भी राज्य में सबसे अधिक नियुक्ति की प्रक्रिया को सकुशल संपन्न कराने में हम सफल हुए हैं? सभी भर्तियां पारदर्शी तरीके से हुई हैं. किसी पर भी सवाल नहीं खड़े हुए हैं. आने वाले दिनों में अधीनस्थ चयन सेवा आयोग अकेले ही 32000 से ज्यादा नियुक्त प्रक्रिया को संपन्न करेगा. शिक्षा चयन आयोग इसमें हजारों शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया इसके माध्यम से संपन्न कराएगा. उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग लगभग 15000 भर्ती इस वर्ष संपन्न करेगा. उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती और प्रोन्नति बोर्ड की तरफ से वर्तमान में सब इंस्पेक्टर और होमगार्ड की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है. परीक्षा संपन्न हो चुकी है. इन दोनों को मिलाकर लगभग 45000 संख्या होगी और लगभग इतनी ही और भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है. यह मान कर चलिए कि अगले एक वर्ष के अंदर 2026-2027 के अंदर अकेले यूपी के अंदर डेढ़ लाख भर्ती की इन सभी विभागों की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी.
उन्होंने कहा कि आज हमारे पास हर जनपद में एक-एक मेडिकल कॉलेज है, पहले नहीं थे. पहले मेडिकल कॉलेज के बारे में कोई सोचता भी नहीं था. आज उत्तर प्रदेश के अंदर 81 मेडिकल कॉलेज और दो एम्स वर्तमान में कार्यरत हैं. जो लोगों को अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अच्छे सुपर स्पेशलिटी के हॉस्पिटल खुल रहे हैं. नर्सिंग कॉलेज खुल रहे हैं. पहले न कॉलेज थे और न ही उनमें स्टाफ था. सब भगवान भरोसे था. स्वाभाविक रूप से परिणाम भी उसी तरह का आता था. पूरा सिस्टम ही बीमार था. खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन के बारे में लोग जानते ही नहीं थे. जबकि बहुत महत्वपूर्ण विभाग है. आप कौन सी दवा ले रहे हैं उस दवा में उसके अनुसार वह साल्ट पड़ा है या नहीं, उसकी क्वालिटी है या नहीं है. एक पक्ष ये है और दूसरा पक्ष खाद्य सुरक्षा से संबंधित है. हर एक आइटम में मिलावट होती थी. अब उस मिलावट को रोकेगा. उसको पुलिस थोड़े ही रोक पाएगी. उसके लिए जो विभाग जिम्मेदार था उसके पास आवश्यक उपकरण ही नहीं थे. जांच करने के लिए लैब भी नहीं थी. अगर कभी वह नमूना लेता था तो नमूने के परिणाम आने में बरसों लग जाते थे. तब तक मिलावट करने वाला अगर बहुत भाग्यशाली होता तो वही जीवित रहता होगा, नहीं तो वह दूसरे लोक की यात्रा में अपनी मौत मर जाता था. उसको कोई सजा नहीं हो पाती थी. आज ऐसा नहीं है.
मार्केट में जो डेयरी के माध्यम से दूध बेच रहा है, उसकी क्वालिटी को सुनिश्चित करने के लिए सख्त हिदायत दी गई है और मिलावट करते हुए पाया जाएगा तो उसके बाद उसकी क्या स्थिति है. खाद्य तेल की स्थिति, पर्व और त्योहार के पहले मिठाई की क्या स्थिति होती थी पहले किसी भी मिठाई की दुकान में व्यक्ति किसी को उपहार देने जा रहा है और पता लगा इतनी उसमें मिलावट होती थी कि उपहार के बजाय वह जहर बन जाता था. अब नहीं कर सकते हैं. जिस विभाग को इसके लिए काम करना था उसके पास न.आदमी थे न लैब थी और न लैब में इक्विपमेंट थे. अब हम लोगों ने औषधि के बारे में जांच करने के लिए, कोई भी ड्रग की जांच करने के लिए हमारे पास हर एक रेंज स्तर पर एक लैब है. ए ग्रेड की लैब है. उसमें इक्विपमेंट है. खाद्य सुरक्षा से जुड़े हुए नमूने अब जो लिए जाएंगे उन नमूनों को जांच करने के लिए अब ऐसा नहीं कि बलिया का व्यक्ति आगरा जा रहा है, बल्कि इस कमिश्नरी के अंदर इस मंडल के अंदर उसकी उसकी जांच के लिए लैब उपलब्ध हैं.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले औषधि परीक्षण की पांच प्रयोगशालाएं थीं. अब हमारे पास 18 प्रयोगशालाएं हो गई हैं. सोचिए आजादी के बाद से अब तक सिर्फ पांच प्रयोगशालाएं थीं. हमने नौ साल के अंदर 18 कर दी हैं. पहले एक साल में सिर्फ 12000 नमूने ही लिए जा सकते थे, लेकिन अब सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही 55 हजार से ज्यादा नमूने लिए जा सकते हैं. पहले एनालिस्ट की संख्या सिर्फ 44 थी अब हमने 357 और भर्ती की. अब इनकी संख्या 401 हुई है. खाद्य सुरक्षा से जुड़ी पहले सिर्फ छह प्रयोगशालाएं थीं. अब 18 प्रयोगशालाएं हो गई हैं. पहले प्रति वर्ष सिर्फ 36000 नमूने लिए जा सकते थे अब प्रतिवर्ष 1,08,000 नमूने लिया जा सकेंगे जिससे क्वालिटी सुनिश्चित हो सकेगी. मनुष्य के स्वास्थ्य के साथ किसी तरह का खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चयनित अभ्यर्थियों से कहा कि निष्पक्षता और पारदर्शिता क्या होती है इसका उदाहरण यह है कि आपके भर्ती बोर्ड के चेयरमैन आपके बीच ही बैठे हैं, लेकिन आपको पता नहीं है कि वह कैसे हैं. उनकी शक्ल कैसी है, जबकि उन्होंने ही आपकी भर्ती प्रक्रिया को संपन्न किया है. इसी को कहते हैं क्या होती है पारदर्शिता. पहले भर्ती बोर्ड के चेयरमैन बैठते थे और चाचा भतीजे सूची तैयार कर वसूली के लिए निकल पड़ते थे. जब हवालात में जाने की नौबत आती थी तब चेयरमैन को भेज देते थे. बेईमान राजनीतिज्ञ, भ्रष्ट नौकरशाहों को रोकना है तो शुरुआत अपने आप से करिए. हम सबको अपने आप से इसकी शुरुआत करनी होगी. आम जनमानस ईमानदारी के साथ अपना जीवन आगे बढ़ना चाहता है. उस प्रक्रिया के साथ हमें खुद को जोड़ना पड़ेगा. हमें इस बात को देखना होगा कि हमें निष्पक्ष तरीके से, पारदर्शी तरीके से इस व्यवस्था के साथ जुड़ने का अवसर प्राप्त हो रहा है. आपकी पीढ़ी सौभाग्यशाली है कि आपके सपनों को एक नई उड़ान देने के लिए सरकार ने उस तरह का प्लेटफार्म उपलब्ध करवाया है.