नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दो दिवसीय वार्षिक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत करते हुए कहा कि विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिए ‘ग्लोबल साउथ’ को नियमों का पालन करने वाले के बजाय ”नियम तय करने वाला” बनना होगा.
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर एक विशिष्ट पहचान स्थापित की है और यह गुट किसी के विरुद्ध नहीं है. उनके इस बयान को अमेरिका और अन्य पश्चिमी शक्तियों के लिए एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”आज ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों में पहली पंक्ति में खड़ा है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में वह सबसे पीछे की पंक्ति में है. हमें इस ‘विशेषाधिकार के पिरामिड’ को ‘साझेदारी के मंच’ में बदलना होगा. उन्होंने कहा कि एक ऐसा मंच हो जहां हर देश की आवाज हो, इसके अलावा हर सदस्य की हिस्सेदारी हो और हर प्रयास के केंद्र में मानवता का विकास हो.
उन्होंने कहा, ”इस संबंध में, मेरा प्रस्ताव है कि हम संयुक्त रूप से वैश्विक शासन सुधार के लिए 10 प्रस्ताव को तैयार करें, जिसका मकसद अगले शिखर सम्मेलन तक उन्हें एक ब्रिक्स सुधार रोडमैप का रूप देना हो.”
पीएम मोदी ने ये टिप्पणियां रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिंनपिंग, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की मौजूदगी में कीं
शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले अन्य नेताओं में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, इथियोपिया के पीएम अबी अहमद अली, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी और वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हुंग शामिल हैं.
पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में तत्काल सुधार का भी आह्वान किया. उन्होंने कहा कि यूएनएससी सुधारों के लिए अब और इंतजार नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा, ”वैश्विक शासन की वर्तमान संरचना एक पिरामिड की तरह दिखती है- सत्ता और निर्णय लेने की शक्ति शीर्ष पर केंद्रित है, जबकि निचले स्तरों में वे देश शामिल हैं जो इन निर्णयों से प्रभावित होते हैं और उन्हें आकार देने में असमर्थ हैं.”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया के सामने मौजूद विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिए ग्लोबल साउथ को ”नियम तय करने वाला” बनना होगा. उन्होंने नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच एक नाविक नेटवर्क का भी प्रस्ताव रखा.