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शंकराचार्य बनने के तय नियम, कोई भी नहीं ले सकता पद: सीएम योगी

लखनऊ: ज्योतिष पीठ से जुड़े हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के विषय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहली बार टिप्पणी की है. विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने एक ऐसे मुद्दे पर विवाद खड़ा किया, जिसमें कोई भी गंभीरता नहीं थी.

परंपराओं का पालन न करना अनुचित था: मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी किसी भी पद को जबरदस्ती नहीं ले सकता. हर जगह की एक परंपरा होती है कुछ नियम होते हैं और नियमों का पालन करना सभी के लिए जरूरी होता है. वह मुख्यमंत्री हो और या कोई और हो. सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मौनी अमावस्या के दिन परंपराओं का पालन न करना अनुचित था.सबको नियम के हिसाब से ही चलना होगा: सीएम योगी ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने गलत मुद्दा उठाया. उनको अपने समय में भी देखना चाहिए था. कोई भी व्यक्ति मुख्यमंत्री बनकर उत्तर प्रदेश में घूम नहीं सकता, कोई मंत्री नहीं बन सकता. कोई समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर नहीं घूम सकता. हर जगह नियम का पालन करना जरूरी होता है. वह सबको करना पड़ता है.

चार स्थानों पर चार शंकराचार्य पीठ हैं: योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कानून सबके लिए बराबर है. जो भी गलत करेगा, उसका हिसाब कानून से ही किया जाएगा. जगतगुरु शंकराचार्य ने चार स्थानों पर चार शंकराचार्य पीठ बनाए थे. सभी के अपने वेद हैं. सभी के अपने नियम है और सबको नियम के हिसाब से ही चलना होगा.

शंकराचार्य का पद सर्वोच्च और अत्यंत पवित्र है: सनातन धर्म में शंकराचार्य का पद सर्वोच्च और अत्यंत पवित्र है और इसके लिए आदि जगतगुरु शंकराचार्य द्वारा निर्धारित की गई मर्यादाओं का पालन करना अनिवार्य है. योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में सपा नेताओं से सवाल किया कि यदि वे उन्हें शंकराचार्य मानते थे, तो वाराणसी में उनकी सरकार के दौरान उन पर लाठीचार्ज क्यों करवाया गया था.

सनातन को कमजोर करने की साजिश: सीएम योगी ने कहा कि जिस दिन करोड़ों की भीड़ हो, उस समय रास्ता ब्लॉक करना किसी जिम्मेदार व्यक्ति का आचरण नहीं हो सकता. हर किसी को नियमों और मर्यादाओं का पालन करना होगा और कोई भी वातावरण खराब नहीं कर सकता. कुछ लोग धर्म की आड़ में सनातन को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं और ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिए.

प्रशासन ने शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा था: यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब जनवरी 2026 में माघ मेले के दौरान प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को संगम जाने से रोका था. उनसे उनके शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा था. इसके जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी को ‘अहंकारी’ बताया था और उन्हें 40 दिन के भीतर गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने और अपने ‘हिंदू होने का प्रमाण’ देने की चुनौती दी थी.