लखनऊ: ‘योगी की पाती’ के जरिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बार प्रदेश के बच्चों और युवाओं से मुखातिब हुए. जिसमें सीएम योगी ने दोनों को सोशल मीडिया के खतरों के बारे में जानकारी दी. साथ ही उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि रील बनाने और खतरनाक स्टंट करने की होड़ जानलेवा हो सकती है, इसलिए युवाओं को रील की जगह रियल लाइफ चुनने की सलाह दी है. वहीं योगी ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे रोजाना बच्चों से बात करें, उनका मोबाइल इस्तेमाल देखें और उन्हें खतरनाक स्टंट से दूर रखें.
दरअसल सिद्धार्थनगर के कांशीराम कॉलोनी में शनिवार को हुए पानी टंकी हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया. 30 साल पुरानी जर्जर टंकी पर रील बनाने चढ़े पांच बच्चों में से तीन सीढ़ी टूटने से नीचे गिर पड़े. 10 साल के सिद्धार्थ की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गोलू और सनी गंभीर हालत में गोरखपुर रेफर किए गए. वहीं पवन और शाबान टंकी के ऊपर ही 16 घंटे तक फंसे रहे.
हादसे की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद कमान संभाली.उन्होंने अफसरों को सख्त निर्देश दिए कि बच्चों को सुरक्षित निकालने में कोई ढिलाई न हो. रातभर एसडीआरएफ की कोशिशें जलभराव और दलदली जमीन के कारण नाकाम रहीं. हालात बिगड़ते देख डीएम ने राहत आयुक्त से हेलीकॉप्टर मांगा. रविवार सुबह 5.20 बजे भारतीय वायुसेना का हेलीकॉप्टर पहुंचा और दोनों बच्चों को एयरलिफ्ट कर गोरखपुर पहुंचाया गया.
सिद्धार्थनगर की इस दर्दनाक घटना के बाद सीएम योगी ने अपने फेमस कॉलम सीएम की पाती के जरिए बच्चों को संबोधन करते हुए एक भावुक चिट्ठी लिखी. चिट्ठी में उन्होंने माता-पिता से सीधी अपील की. लिखा कि सोशल मीडिया की चमक-दमक और रील के चक्कर में बच्चे अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं. हमें उन्हें समझाना होगा कि लाइक्स और व्यूज से बड़ी रियल जिंदगी है. बच्चे देश का भविष्य हैं, उनका एक पल का रोमांच पूरे परिवार पर भारी पड़ सकता है.
सीएम ने अभिभावकों से संकल्प लेने को कहा कि वे रोजाना बच्चों से बात करें, उनका मोबाइल इस्तेमाल देखें और उन्हें खतरनाक स्टंट से दूर रखें. साथ ही प्रशासन को भी निर्देश दिए कि सभी जर्जर सरकारी संपत्तियों को चिन्हित कर तुरंत सील किया जाए ताकि दोबारा ऐसा हादसा न हो.
डीएम शिवशरणप्पा ने बताया कि टंकी दो दशक पहले ही कंडम घोषित हो चुकी थी, फिर भी बच्चे वहां पहुंच गए. स्थानीय लोगों ने कहा कि बच्चे अक्सर उस टंकी पर चढ़ते थे. सीएम योगी की यह चिट्ठी सिर्फ पत्र नहीं, एक चेतावनी है. रील की दुनिया से बाहर निकलकर हमें बच्चों को रियल जिंदगी का मतलब सिखाना होगा. एक लापरवाही पूरे घर का चिराग बुझा सकती है.