यूपी में DM के बाद अब 82 SDM के तबादले की तैयारी, योगी सरकार से हरी झंडी का इंतजार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 82 से ज्यादा उप जिलाधिकारियों (एसडीएम) के तबादले की तैयारी पूरी हो चुकी है. प्रदेश सरकार जल्द ही एसडीएम स्तर के पीसीएस अफसरों की तबादला सूची जारी करने वाली है. यह सूची कभी भी जारी हो सकती है. लखनऊ में तैनात कई पीसीएस अफसरों को दूसरे जिलों में भेजा जाएगा.

सभी तैयारियां पूरी हो चुकीं हैं: कार्मिक और नियुक्ति विभाग ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है. विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक तबादले का मुख्य आधार यह है कि जो अफसर किसी जिले में 30 मई 2027 तक तीन साल पूरा कर रहे हैं, उनका नाम सूची में शामिल किया गया है. तबादले की प्रक्रिया में कई चरण पूरे किए जा चुके हैं.हर जिले के कलेक्टर (डीएम) ने अपने जिले में तैनात पीसीएस अफसरों की कार्यप्रणाली की रिपोर्ट तैयार की. डीएम ने अफसरों को ग्रेडिंग देकर यह रिपोर्ट कमिश्नर को भेज दी.इसके बाद नियुक्ति विभाग ने कमिश्नर से मंडल स्तर पर कुछ खास बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी.अफसरों की पति-पत्नी की पोस्टिंग का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है ताकि परिवार को ज्यादा परेशानी न हो लेकिन तबादलों में सिर्फ नियम ही नहीं, सिफारिशों का भी बड़ा खेल चल रहा है.

कई अफसर जुगाड़ में जुटे: कई मजबूत पीसीएस अफसरों ने अपने तबादले रुकवाने के लिए जुगाड़ लगा रखा है. नेता और मंत्री एसडीएम अफसरों की जमकर सिफारिश कर रहे हैं. उनके भेजे गए पत्रों पर विशेष विचार किया जा रहा है. गोरखपुर, प्रयागराज और लखनऊ जैसे बड़े जिलों में तैनात पीसीएस अफसर अपनी पहुंच के दम पर तबादला रद्द करवाने में माहिर माने जाते हैं.इन जिलों पर प्रशासन का खास फोकस है.

ऐसे बना तबादला फार्मूला: पीसीएस अफसरों के तबादले का फॉर्मूला काफी साफ है.पहले डीएम ने जिले के हर पीसीएस अफसर की रिपोर्ट बनाई.फिर कमिश्नर स्तर पर जांच हुई. पति-पत्नी की पोस्टिंग को प्राथमिकता दी जा रही है.साथ ही, नेताओं और मंत्रियों की सिफारिशों को भी महत्व दिया जा रहा है. कई अफसर अपनी अच्छी कार्यप्रणाली के आधार पर वर्तमान जिले में बने रहना चाहते हैं, जबकि कुछ को बेहतर जिले में जाने की इच्छा है.

प्रदेश में पीसीएस अफसरों के तबादले नियमित प्रक्रिया है, लेकिन इस बार संख्या ज्यादा होने से चर्चा तेज हो गई है. सूत्र बताते हैं कि 82 से अधिक एसडीएम प्रभावित होंगे.लखनऊ से कई अनुभवी अफसरों को जिला मुख्यालयों से बाहर भेजा जाएगा.इससे छोटे जिलों में प्रशासनिक मजबूती बढ़ेगी.अफसरों की कार्यप्रणाली, जिले में बिताया समय और सिफारिशें तीन मुख्य आधार हैं. अगर कोई अफसर तीन साल पूरे कर रहा है तो उसका तबादला लगभग तय माना जा रहा है. हालांकि, मजबूत सिफारिश वाले अफसर बच सकते हैं.यह तबादला सूची जारी होते ही प्रशासनिक स्तर पर हलचल मच जाएगी.

कई अफसर नए जिलों में जाकर अपनी जिम्मेदारियां संभालेंगे. पति-पत्नी की पोस्टिंग का ध्यान रखने से परिवारों को राहत मिलेगी लेकिन जो अफसर सिफारिशों के बावजूद ट्रांसफर हो जाएंगे, उनमें नाराजगी भी देखी जा सकती है.सरकार का प्रयास है कि तबादले पारदर्शी तरीके से हों और प्रशासन की कार्यक्षमता बढ़े. फिर भी सिफारिशों का असर हमेशा रहता है.अब नजर इस बात पर है कि कब सूची जारी होती है और कौन-कौन से अफसर कहां जाते हैं.