पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भूमि लीज नीति को मंत्रिपरिषद ने किया अनुमोदित

भूमि लीज नीति के तहत निवेशकों को मिलेगी आकर्षक सुविधाएं- जयवीर सिंह

लखनऊ: उत्‍तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को सम्पन्न हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश पर्यटन की भूमि लीज नीति को मंजूरी प्रदान की गयी। पर्यटन विभाग ने निवेशकों की सुगमता के लिए यह नीति तैयार की है, जिसमें भूमि की सूची बनाकर भूमि बैंक के रूप में चिन्हित किया जा सकेगा। इसके बाद रुचि अभिव्यक्ति आमंत्रित की जाएगी। लीज 30-30 वर्ष अधिकतम 90 वर्ष रहेगी।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि सरकार निवेशकों की मदद के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है, जिससे प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा मिले। इसका ताजा उदाहरण उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की भूमि लीज नीति है। उन्‍होंने यह जानकारी देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश की पर्यटन नीति-2022 का उद्देश्य पर्यटन में वृद्धि एवं राज्य में पर्यटन उद्योग को देश के सबसे पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करना है। प्रदेश में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 में पर्यटन नीति के आकर्षण के कारण पर्यटन क्षेत्र में लगभग डेढ़ लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन 1,187 प्रस्तावो में से 643 प्रस्ताव के निवेशकों द्वारा भूमि लीज पर आवंटित किए जाने का अनुरोध किया गया है।

पर्यटक उपयुक्‍त भू-खंड की पहचान कर बनाई जाएगी लिस्‍ट

जयवीर सिंह ने बताया कि विभाग पट्टे के आधार पर भूमि आवंटन के लिए जनपद एवं पर्यटक उपयुक्त भू-खंड की पहचान कर सूची बनाएगा और इसे पर्यटन विभाग के भूमि बैंक के रूप में चिन्हित किया जाएगा। छोटे भूखंडों को “जहां है जिस स्थिति में है“ के आधार पर आवंटित करेगा। बड़े भूखंड पर यूनिट पार्सल के रूप में आवंटन के लिए प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर विस्तृत लेआउट तैयार किया जाएगा। निवेशक आवंटित भूखंड पर पर्यटन सुविधाओं के विकास के डिजाइन, वित्तपोषण और विकसित करेंगे।

पर्यटन मंत्री ने बताया कि भूस्थल के आसपास आधारभूत संरचनाओं एवं अवस्थापना सुविधाओं संबंधी विकासात्मक कार्यों पर होने वाले खर्च संबंधित विभाग द्वारा यथासंभव उनके बजट प्राविधान से किया जाएगा। जिनके लिए विभागीय बजट का प्राविधान नहीं होगा, उसका आंकलन कर पर्यटन विभाग द्वारा बजटीय प्राविधान किया जाएगा। पर्यटन विभाग द्वारा तैयार किए गए प्रारूप के अनुसार निवेशक डीपीआर तैयार करेंगे।

तकनीकी समिति करेगी प्रस्‍तावों का मूल्‍यांकन

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने बताया कि दूसरे चरण में प्रस्तावों का तकनीकी मूल्यांकन किया जाएगा। संभावित निवेशकों द्वारा प्रस्ताव प्रमुख सचिव पर्यटन की अध्यक्षता में गठित तकनीकी समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। निवेशक भारत के बाहर स्थित संगठनों वाले निवेशकों के साथ संयुक्त उद्यम के रूप में निवेश के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकते हैं। निवेशकों को भारत सरकार द्वारा वैध और योग्य माने जाने वाले विदेशी निवेशकों के साथ संयुक्त उद्यम के अंतर्गत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लाने की अनुमति होगी।

पर्यटन मंत्री ने बताया कि एकल निवेशक यदि किसी भूखंड के लिए मात्र एक तैयार प्रस्ताव प्राप्त होता है तो तकनीकी समिति द्वारा आरक्षित मूल्य के अनुसार भूखंड को लीज पट्टे पर देने का विचार करते हुए एकल निविदा के प्रस्ताव को अनुमोदन के लिए मुख्य सचिव को अनुशंसित किया जाएगा। एकाधिक निवेशक यदि किसी भूखंड के लिए एक से अधिक निवेशक हैं तो नीलामी प्रक्रिया का पालन कर आरक्षित मूल्य के अनुसार पट्टे पर देने का विचार किया जाएगा। संबंधित भूखंड के लिए उच्चतम प्रीमियम प्रस्तावित करने वाले निवेशकों को भूमि आवंटन की कार्यवाही की जाएगी। भूमि प्रीमियम निवेशक को निर्धारित भूमि का सर्किल रेट (एक आवेदक के मामले में) और उच्चतम नीलामी मूल्य (एक से अधिक आवेदक के मामले में) के बराबर एकमुश्त प्रीमियम देय होगा।

जयवीर सिंह ने बताया कि वार्षिक पट्टा किराया प्रथम दो वित्तीय वर्ष के लिए अंतिम भूमि प्रीमियम का एक प्रतिशत वार्षिक पट्टा किराया विकासकर्ता द्वारा देय होगा। तीसरे वित्तीय वर्ष से पट्टा किराया प्रतिवर्ष पांच प्रतिशत वृद्धि के साथ विकासकर्ता द्वारा देय होगा। संबंधित विभाग से सभी आवश्यक अनुमोदन, अनापत्ति आदि प्राप्त करने के लिए नौ माह का समय दिया जाएगा। पट्टा डीड पर हस्ताक्षर के 30 माह के भीतर सभी निर्माण गतिविधियां पूरी करनी होंगी। 30 माह के भीतर परियोजना पूरी नहीं होने पर पट्टा डीड स्वत: समाप्त हो जाएगी।