हैदराबाद: मशहूर भारतीय कर्नाटक गायिका एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी की बायोपिक बहुत जल्द पर्दे पर दिखने वाली हैं. इसमें रश्मिका मंदाना के मुख्य भूमिका निभाने की अटकलें लगाई जा रही थीं. अब मेकर्स ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि रश्मिका आने वाली फिल्म में इस मशहूर गायिका का किरदार निभाएंगी.कल एक ग्रैंड इवेंट में साउथ सुपरस्टार कमल हासन बतौर चीफ गेस्ट बायोपिक से जुड़ा बड़ा एलान करेंगे. आइए जानते हैं कि एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी कौन हैं, जिनका किरदार रश्मिका निभाएंगी.
15 सितंबर को फिल्म के मेकर्स ने एमएस सुब्बुलक्ष्मी का फोटो शेयर कर एलान किया कि वह इस गायिका की बायोपिक बनाने का फैसला लिया है. मेकर्स ने कंफर्म किया है कि रश्मिका मंदाना ही एमएस सुब्बुलक्ष्मी का किरदार करेंगी. फिल्म की ऑफिशियल लॉन्चिंग 16 सितंबर, 2026 को होगी, जो गायिका की 110वीं जयंती का दिन भी है.
मेकर्स ने एक्स हैंडल पर जानकारी देते हुए लिखा है, ‘एक शानदार विरासत की शुरुआत एक यादगार जश्न के साथ होती है. भारत रत्न एमएस सुब्बुलक्ष्मी अम्मा की 110वीं जयंती के मौके पर एमएस- ए लेगसी ऑन स्क्रीन के ग्रैंड लॉन्च का गवाह बनें, जिसमें मुख्य अतिथि के तौर पर उलगनायगन कमल हासन गारू शामिल होंगे.’
कौन हैं एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी?
एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी कर्नाटक संगीत की दुनिया की एक महान भारतीय गायिका थीं. उनका जन्म 16 सितंबर, 1916 को मदुरै, मद्रास प्रेसीडेंसी (अब तमिलनाडु) में एक ऐसे परिवार में हुआ था, जहां दिन की शुरुआत संगीत से होती थी. उनकी मां, षणमुखवदिवु अम्मल, एक मशहूर वीणा वादक थीं, जबकि उनकी दादी वायलिन वादक थीं. सुब्बुलक्ष्मी का पूरा नाम मदुरै शनमुखावदिवु सुब्बुलक्ष्मी था. सुब्बुलक्ष्मी को लोग प्यार से ‘कुंजम्मा’ भी कहते थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह सुबह एक स्केल पर रियाज करती थी और पूरे दिन उसे गुनगुनाया करती थी.
सुब्बुलक्ष्मी का पहला सार्वजनिक कार्यक्रम
उन्होंने कम उम्र में ही संगीत सीखना शुरू कर दिया था और 1927 में 11 साल की उम्र में तिरुचिरापल्ली के रॉकफोर्ट मंदिर में अपना पहला सार्वजनिक कार्यक्रम किया था. देखते ही देखते उनकी आवाज दूर-दूर तक फैल गई. उनके कार्यक्रम की टिकटें भी सॉल्ड आउट हो जाती थी.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, गायिका ने मशहूर गायक सेम्मंगुडी श्रीनिवास अय्यर से कर्नाटक संगीत की ट्रेनिंग ली और बाद में पंडित नारायणराव व्यास से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत सीखा. वह दक्षिण भारत की सबसे सम्मानित शास्त्रीय संगीतकारों में से एक बनीं. उन्होंने कर्नाटक शास्त्रीय संगीत, भजन और भक्ति गीतों पर अपनी पकड़ बनाई. वह कई भाषाओं में गायन और भारत की सांस्कृतिक राजदूत के तौर पर अपनी भूमिका के लिए जानी जाती थीं. समय के साथ उन्होंने लाइव गायन से आगे बढ़कर फिल्मों में प्लेबैक सिंगिंग भी शुरू की.
इन फिल्मों में आईं नजर
एक गायिका के तौर पर अपने शानदार करियर के अलावा, एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी 1930 और 1940 के दशक में कुछ फिल्मों में भी नजर आईं. उनकी खास फिल्मों में ‘सेवा सदनम’ और ‘मीरा’ शामिल हैं, जिनमें उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई थी.
UNO में परफॉर्म करने वाली पहली भारतीय
वह भारत रत्न पाने वाली पहली संगीतकार थीं. इसके अलावा उन्हें 1974 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार, पद्म भूषण, पद्म विभूषण और अन्य सम्मान भी मिले. 1966 में, वह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में परफॉर्म करने वाली पहली भारतीय बनीं. उनके कुछ सबसे मशहूर कामों में भज गोविंदम, वेंकटेश सुप्रभातम, विष्णु सहस्रनाम, भावयामि गोपालबालम और मैत्रीम भजत शामिल हैं. 11 दिसंबर, 2004, यह वो दिन था, जब सुब्बुलक्ष्मी 88 साल की उम्र में इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गई थीं.

