लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस के मुखिया DGP राजीव कृष्ण ने आला अधिकारियों के साथ अपराध की समीक्षा बैठक की. DGP ने प्रदेश भर के अधिकारियों से कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, लंबित विवेचनाओं और त्योहारों के दौरान लॉ एंड ऑर्डर को लेकर की जा रही तैयारी की समीक्षा की.
समीक्षा बैठक के दौरान DGP उत्तर प्रदेश ने कहा कि जनवरी 2028 से नए आपराधिक कानून के तहत ई-साक्ष्य व्यवस्था लागू होगी. DGP ने अधिकारियों से पर्याप्त डिजिटल ई-साक्ष्य एकत्रीकरण करने के लिए प्रशिक्षण को प्रभावी तरीके से लागू करने के निर्देश दिए है.
DGP ने कहा कि इस तरह से पुलिस दोषियों के खिलाफ कोर्ट में मजबूत पैरव कर पाएगी और कोर्ट को दोषियों को खिलाफ सजा सुनाने में सहायता होगा. बैठक में DGP ने ई-समन प्रणाली की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में इस संबंध का उपयोग बढ़कर 28% हो गया है. इसे अभी और बढ़ाने की आवश्यकता है.
इस दौरान DGP ने आईजीआरएस शिकायतों को समय से निस्तारित करने और शिकायतों का निस्तारण गुणवत्ता पूर्वक करने के निर्देश दिए हैं. अधिकारियों को संबोधित करते हुए DGP ने कहा कि 60 से 90 दिनों से अधिक समय से लंबी विवेचनाओं के निस्तारण के लिए अगले तीन महीने में विशेष अभियान चलाया जाएगा. इसी के साथ ही यक्ष एप के माध्यम से सक्रिय और आदतन अपराधियों की निगरानी और सत्यापन को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए है.
DGP ने बैठक में अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि वह अपने CUG मोबाइल फोन सदैव सक्रिय रखें. जनप्रतिनिधि, मीडिया और आमजन की कॉल का जवाब दें. यदि किसी कारणवश फोन रिसीव नहीं हो पा रहा है तो कॉल बैक करें.
बैठक में अधिकारियों को संबोधित करते हुए DGP ने कहा कि सड़क सुरक्षा की समीक्षा के दौरान बताया गया है कि जिन थानों में जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक (ZFD) व्यवस्था लागू है, वहां सड़क दुर्घटना में 12% तक कमी देखी गई है.
इस सफल प्रयोग को देखते हुए प्रदेश के 100 अतिरिक्त सथनों में भी ZFD अभियान शामिल करने के निर्देश दिए है. साथ ही DGP ने महिला अपराध, गौतस्करी और अवैध धर्मांतरण जैसे संवेदनशील अपराधों को लेकर अधिकारियों से सवाल-जवाब किया. प्रभावी विवेचना और अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए हैं.