यूपी सरकार का बड़ा कदम: नाविकों का ₹50 में होगा रजिस्ट्रेशन, बीमा समेत मिलेंगी कई सुविधाएं

लखनऊ: यूपी में जल परिवहन को रफ्तार देने के लिए नाविकों से सुझाव लिए गए हैं. अंतर्देशीय जल परिवहन प्राधिकरण और परिवहन विभाग के अधिकारी मिलकर सुझावों पर अमल कर रहे हैं. नाविकों से बातचीत की जा रही है, और अगर सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही सरकार को बड़े बदलाव के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा.

प्लान में क्या है खास?: विभाग जिस प्रस्ताव पर काम कर रहा है. उसमें यंत्र चालित नावों का रजिस्ट्रेशन नंबर मिलेगा. बिना यंत्र चालित नावों का नामांकन होगा. नामांकन बहुत आसानी से होगा. हर तहसील में एएमवीआई इनका एनरोलमेंट करेंगे. उनका रजिस्ट्रेशन सिर्फ ₹50 में होगा. उनकी एक पहचान होगी. एक घाट निश्चित किया जाएगा. जिस घाट से जो नाव एनरोल्ड होगी उसी घाट से वह संचालित होगी. उनके बीमा की व्यवस्था की गई है. कल्याण फंड निधि की व्यवस्था की गई है.

नाविकों का मत लिया गया है कि, उनके हित के लिए क्या चीज होगी. जिसे इनकॉरपोरेट करा दिया जाए. उनको बताया गया कि यह नियमावली जो शासन की तरफ से लाई जा रही है वह उनके हित में है.- राधेश्याम, डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर (इनलैंड वॉटरवेज)

नाविकों को कुछ मुद्दों पर है एतराज: दो दिन पहले बनारस में मंडलायुक्त, परिवहन विभाग के अधिकारियों और शासन के अफसरों की बैठक हुई है. जिसमें कई तरह के सुझाव आए हैं. नाविकों को एक आशंका है कि, डिपार्टमेंट बदलेगा तो कठिनाई होगी, इसलिए बनारस के नाविक बार-बार यह कह रहे थे कि, उनका रजिस्ट्रेशन या नामांकन नगर निगम से किया जाए.

जो बैठक हुई उसमें बनारस के कमिश्नर के साथ ही शासन के जॉइंट सेक्रेटरी गए थे. नाविकों को बताया गया कि, नया इनलैंड वेसल्स एक्ट 2021 लागू हुआ है. अब जिस विभाग को सरकार नॉमिनेट करेगी. वह यह काम करेगा. उसके स्टैंडर्ड को मानना पड़ेगा. चाहे परिवहन करे या नगर निगम. आपको कौन सा विभाग कर रहा है. इससे आपत्ति नहीं होनी चाहिए.- राधेश्याम, डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर (इनलैंड वॉटरवेज)

क्या चाहते हैं नाविक?: नाविकों ने घाट प्रबंधन की मांग की है. जो यंत्र चालित नाव हैं, उनका सर्वे आसानी से करवाना चाह रहे हैं. उनकी फीस कम हो या सीएसआर फंड से किया जाए. उनकी मांग है कि, ऐसा फंड क्रिएट हो जाए जिससे उनके ऊपर आर्थिक भार न आए. उनकी सभी नावों की टेस्टिंग हो जाए. टेस्टिंग में उनके प्रतिनिधि रहें. जो कमी निकाली जाए वह उन्हें मालूम हो कि यह हमारी नाव में कमी है. गलत तरीके से उनकी नाव में कमी न निकाली जाए. इसके अलावा उनकी मांग थी कि मदद के लिए अस्थाई सरकारी सेवक के रूप में भर्ती भी की जाए.

नाविकों का यह भी कहना था कि घाट पर कुछ लोग एकाधिकार किए हैं. उसको समाप्त किया जाए. सभी को समान अवसर दिया जाए. जिनका पारंपरिक धंधा नहीं है. ऐसे बाहरी लोग आकर इसमें शामिल हो रहे हैं, उनको रोका जाए. हमारी रोजी-रोटी उनसे प्रभावित हो रही है. उन्हें बताया गया कि नियम कानून बन रहा है. यह किसी एक के लिए नहीं बन रहा है. प्राथमिकता आप होंगे, लेकिन अगर कोई यह काम करना चाहता है तो उसे भी इससे वंचित नहीं किया जा सकता है.- राधेश्याम, डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर (इनलैंड वॉटरवेज)

मतलब अगर कोई दूसरे समुदाय का आदमी भी नियम कानून का पालन करेगा, तो वह भी यह काम कर सकता है.