संत गाडगे जयंती के अवसर पर BBAU एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन            

लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में स्थायी आयोजन समिति और इतिहास विभाग के संयुक्त तत्वाधान में संत गाडगे जयंती के अवसर पर ‘संत गाडगे बाबा का भारतीय समाज एवं संस्कृति में योगदान’ विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य संजय सिंह ने की। इसके अतिरिक्त मंच पर डीन ऑफ अकेडमिक अफेयर्स प्रो एस विक्टर बाबू, स्थायी आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रो केएल महावर, इतिहास विभाग के प्रमुख प्रो वीएम रवि कुमार एवं प्रो शूरा दारापुरी मौजूद रहीं। संगोष्ठी की शुरुआत बाबासाहेब एवं संत गाडगे बाबा के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई।

इसके पश्चात आयोजन समिति की ओर से‌ कुलपति एवं शिक्षकों को पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया। सर्वप्रथम प्रो के एल महावर ने सभी का स्वागत किया एवं कार्यक्रम की रुपरेखा की जानकारी दी। मंच संचालन का कार्य डॉ सुदर्शन चक्रधारी द्वारा किया गया। कुलपति आचार्य संजय सिंह ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि संत शब्द स्वयं में ही अपार मर्यादा को समाहित किये हुए है। संत गाडगे बाबा ने समाज को शिक्षा के महत्व के बारे में समझाते हुए चारित्रिक शिक्षा की महत्ता स्थापित की। उनके द्वारा स्वच्छता को भी प्रोत्साहन दिया गया था। वर्तमान समय में हमें उनके संदेशों को ग्रहण करने की आवश्यकता है।

डीन ऑफ अकेडमिक अफेयर्स प्रो एस विक्टर बाबू ने चर्चा के दौरान कहा कि संत गाडगे आदर्श संत एवं समाज सुधारक थे, जिन्होंने समानता की लड़ाई लड़ते हुए समाज में एकता, अखंडता एवं सामाजिक सद्भावना स्थापित करने का कार्य किया था। इतिहास विभाग के प्रमुख प्रो वीएम रवि कुमार ने संत गाडगे के जीवन के धार्मिक एवं सामाजिक पहलुओं का उल्लेख किया‌। उन्होंने कहा कि संत गाडगे बाबा एवं अन्य संतों ने समाज के उत्थान एवं सुधार हेतु जिस प्रकार के महान कार्य किये हैं, विद्यार्थियों को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर कार्य करने की जरूरत है।